उत्तराखंड में चारधाम यात्रा की शुरुआत अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ हो गई है। हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में वैदिक मंत्रोच्चार और पुष्प वर्षा के बीच यह भव्य आयोजन संपन्न हुआ।
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राज्य समीक्षा डेस्क
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Image: Gangotri and Yamunotri Temples Open Amid Devotional Fervor
उत्तरकाशी: उत्तराखंड में आस्था का सबसे बड़ा पर्व चारधाम यात्रा 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर शुरू हो गई। इसी दिन वैदिक मंत्रोच्चार, धार्मिक अनुष्ठानों और “हर-हर गंगे” व “जय मां गंगे” के जयकारों के बीच गंगोत्री धाम और यमुनोत्री धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए।
Gangotri and Yamunotri Temples Open Amid Devotional Fervor
गंगोत्री धाम के कपाट दोपहर 12:15 बजे शुभ मुहूर्त में विधिविधान के साथ खोले गए। इस दौरान हजारों श्रद्धालु मंदिर परिसर में मौजूद रहे। पूरे धाम में भक्तिमय माहौल बना रहा और हेलीकॉप्टर से श्रद्धालुओं पर पुष्प वर्षा भी की गई। कपाट खुलने से पहले मां गंगा की उत्सव डोली भैरव घाटी से विधिवत पूजा-अर्चना के बाद रवाना हुई। भैरव घाटी में विशेष पूजा के बाद डोली गंगोत्री धाम पहुंची, जहां गंगा पूजन और सहस्रनाम पाठ के बाद कपाट खोले गए। कपाट खुलते ही पूरा क्षेत्र “हर-हर गंगे” और “मां गंगा की जय” के जयकारों से गूंज उठा। पहले ही दिन हजारों श्रद्धालुओं ने गंगा दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त किया। मंदिर को फूलों से भव्य रूप से सजाया गया था। इस पावन अवसर पर पुष्कर सिंह धामी स्वयं गंगोत्री धाम पहुंचे। उन्होंने हर्षिल हेलीपैड पर लैंड करने के बाद स्थानीय जनता और कार्यकर्ताओं से मुलाकात की और गंगोत्री धाम पहुंचकर कपाट खुलने के ऐतिहासिक पल को देखा। आगे पढ़िए..
यमुनोत्री धाम के कपाट भी खुले
गंगोत्री के बाद यमुनोत्री धाम के कपाट भी 19 अप्रैल दोपहर 12:35 बजे श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। इसके साथ ही यमुनोत्री धाम में भी छह माह की तीर्थ यात्रा का शुभारंभ हो गया। मां यमुना की उत्सव डोली खरसाली से ढोल-नगाड़ों और मंत्रोच्चार के बीच रवाना हुई। ग्रामीणों ने भावुक होकर मां यमुना को विदाई दी। परंपरा के अनुसार उनके भाई शनि देव भी उन्हें यमुनोत्री धाम तक छोड़ने पहुंचे। डोली यात्रा के दौरान पूरे क्षेत्र में भक्ति और भावुकता का माहौल रहा। ग्रामीणों ने नम आंखों से मां यमुना को विदा किया। यह परंपरा हर साल आस्था और संस्कृति का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार मां गंगा और मां यमुना अपने-अपने धामों में अगले छह माह तक विराजमान रहेंगी। इस दौरान लाखों श्रद्धालु दर्शन और पूजा-अर्चना का लाभ उठाएंगे।
प्रशासन की व्यापक तैयारियां
चारधाम यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए प्रशासन और मंदिर समिति ने व्यापक व्यवस्थाएं की हैं। सुरक्षा, यातायात और दर्शन व्यवस्था को लेकर विशेष इंतजाम किए गए हैं ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो।