बड़ी खुशखबरी! ऋषिकेश–कर्णप्रयाग रेल प्रोजेक्ट में मई से ट्रैक बिछेगा, ट्रायल ट्रेन का ऐलान

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना में मई से शिवपुरी-ब्यासी के बीच ट्रैक बिछाने का काम शुरू होगा। इस साल के अंत या जनवरी 2027 तक ट्रायल ट्रेन चलाने की योजना है और दिसंबर 2028 तक पूरा प्रोजेक्ट पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
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Rishikesh-Karnprayag Rail Project: Major Update on Rishikesh Karnaprayag Rail Project
Image: Major Update on Rishikesh Karnaprayag Rail Project

ऋषिकेश: ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना में अब तेजी देखने को मिल रही है। इस परियोजना के तहत शिवपुरी से ब्यासी के बीच लगभग 13 किलोमीटर लंबे ट्रैक को बिछाने का काम मई 2026 से शुरू किया जाएगा। रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) इस कार्य को तेजी से पूरा करने की तैयारी में जुटा है ताकि आगे की प्रक्रिया समय पर पूरी की जा सके।

Major Update on Rishikesh–Karnaprayag Rail Project

इस परियोजना के इस हिस्से पर काम पूरा होने के बाद इस साल के अंत या जनवरी 2027 तक ट्रायल ट्रेन चलाने की योजना बनाई गई है। इस ट्रायल के लिए एक इंजन और एक बोगी का इस्तेमाल किया जाएगा, जिसे वहीं पर असेंबल किया जाएगा। इसका उद्देश्य ट्रैक की गुणवत्ता और सुरक्षा की जांच करना है। पूरी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना को दिसंबर 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह परियोजना न केवल परिवहन को बेहतर बनाएगी, बल्कि सामरिक दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।यह परियोजना गढ़वाल क्षेत्र के पांच प्रमुख जिलों—देहरादून, टिहरी गढ़वाल, पौड़ी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग और चमोली—को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने का काम करेगी। इससे पहाड़ी इलाकों में सुरक्षित, विश्वसनीय और हर मौसम में उपलब्ध रेल संपर्क सुनिश्चित होगा और कमजोर सड़क नेटवर्क पर निर्भरता कम होगी।

13 स्टेशनों का निर्माण

इस रेल मार्ग पर कुल 13 रेलवे स्टेशन बनाए जा रहे हैं। ऋषिकेश के वीरभद्र और योगनगरी रेलवे स्टेशनों से पहले ही ट्रेनों का संचालन हो रहा है। शिवपुरी और ब्यासी स्टेशनों पर निर्माण कार्य शुरू हो चुका है, जबकि अन्य स्टेशनों—देवप्रयाग, जनासू, मलेथा, श्रीनगर, धारदेवी, तिलानी, घोलतीर, गौचर और कर्णप्रयाग—के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और मई से निर्माण कार्य शुरू करने की तैयारी है। आगे पढ़िए..

सुरंगों और पुलों का विशाल नेटवर्क

इस परियोजना की कुल लंबाई 125 किलोमीटर है, जिसमें लगभग 104 किलोमीटर यानी 83 प्रतिशत हिस्सा सुरंगों के भीतर से गुजरेगा। इसमें 16 मुख्य सुरंगें और 12 निकास सुरंगें शामिल हैं। इसके अलावा गहरी घाटियों और नदियों पर 19 बड़े और 31 छोटे पुल बनाए जा रहे हैं। ऋषिकेश में चंद्रभागा नदी पर बने पुल पर ट्रैक बिछाया जा चुका है, जबकि ढालवाला से शिवपुरी तक की 10.8 किलोमीटर लंबी सुरंग का निर्माण अभी बाकी है। इस परियोजना के पूरा होने के बाद ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक की यात्रा अवधि लगभग छह घंटे से घटकर केवल ढाई घंटे रह जाएगी। इससे यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी और यात्रा अधिक सुविधाजनक हो जाएगी।

पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा

रेल कनेक्टिविटी बेहतर होने से उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में पर्यटन और तीर्थाटन को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही लॉजिस्टिक्स और व्यापारिक गतिविधियों में भी सुधार आएगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। इस परियोजना के तहत 16 में से 13 मुख्य सुरंगों की खुदाई लगभग पूरी हो चुकी है, जो करीब 98 किलोमीटर यानी 95 प्रतिशत कार्य है। 19 में से 8 प्रमुख रेल पुल भी तैयार हो चुके हैं, जिनमें अलकनंदा नदी पर बने ब्रिज-8 और ब्रिज-9 शामिल हैं। इसके अलावा विद्युत और सिग्नलिंग का कार्य अक्टूबर 2026 से शुरू करने की योजना है।