उत्तराखंड राज्य सूचना आयोग ने स्पष्ट किया है कि IAS, IPS और अन्य अधिकारियों के भ्रष्टाचार मामलों की जानकारी RTI के तहत छिपाई नहीं जा सकती। आयोग ने भ्रष्टाचार और संपत्ति से जुड़े मामलों में पारदर्शिता पर जोर दिया है।
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Image: RTI on Corruption Cases of IAS Officers in Uttarakhand
देहरादून: Uttarakhand में भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) और अन्य लोकसेवकों से जुड़े भ्रष्टाचार मामलों को अब गोपनीय नहीं रखा जा सकेगा। राज्य सूचना आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार या अन्य अनियमितता का मामला दर्ज है, तो उससे जुड़ी जानकारी सूचना के अधिकार (RTI) के तहत उपलब्ध कराई जा सकती है।
RTI on Corruption Cases of IAS Officers in Uttarakhand
आयोग ने अपने आदेश में कहा है कि यदि राज्य सरकार किसी अधिकारी के खिलाफ जांच की अनुमति दे चुकी है या मामला अदालत तक पहुंच चुका है, तो उससे संबंधित जानकारी भी साझा की जा सकती है। इसके साथ ही यह भी सामने आया कि राज्य में IAS अधिकारियों की संपत्ति की स्वतंत्र स्क्रूटनी के लिए कोई अलग सिस्टम मौजूद नहीं है। अधिकारी जो विवरण स्वयं जमा करते हैं, वही रिकॉर्ड में माना जाता है।
संजीव चतुर्वेदी ने मांगी थी जानकारी
Sanjiv Chaturvedi ने मुख्य सचिव कार्यालय के लोक सूचना अधिकारी से नवंबर 2000 से अब तक राज्य के IAS, IPS और IFS अधिकारियों पर सतर्कता विभाग, CBI और ED द्वारा दर्ज भ्रष्टाचार मामलों की जानकारी मांगी थी। उन्होंने अधिकारियों की अर्जित और बेनामी संपत्ति, स्थानांतरण और तैनाती से जुड़ी फाइल नोटिंग और सतर्कता स्थिति से संबंधित सूचनाएं भी मांगी थीं।
विभागों ने सूचना देने से किया था इनकार
गृह विभाग की ओर से बताया गया कि पूर्व डीजीपी पीडी रतूड़ी, बीएस सिद्धू और पूर्व एडीजी राकेश मित्तल के खिलाफ भ्रष्टाचार संबंधी कार्रवाई चल रही है। वहीं कार्मिक और वन विभाग के लोक सूचना अधिकारियों ने यह कहते हुए जानकारी देने से इनकार कर दिया था कि इससे अधिकारियों की सामाजिक प्रतिष्ठा प्रभावित हो सकती है। इसके बाद संजीव चतुर्वेदी ने राज्य सूचना आयोग में अपील दायर की। आगे पढ़िए..
Uttarakhand State Information Commission के सूचना आयुक्त कुशलानंद ने मामले की सुनवाई करते हुए फरवरी में कार्मिक और सतर्कता विभाग को दोबारा परीक्षण कर रिपोर्ट देने को कहा था। 26 अप्रैल को हुई अगली सुनवाई में संजीव चतुर्वेदी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए सूचना सार्वजनिक करने की मांग की। इसके बाद आयोग ने 34 पन्नों का विस्तृत आदेश जारी किया। सुनवाई के दौरान सतर्कता विभाग ने बताया कि Ram Vilas Yadav और Kishan Chand के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामलों में जांच जारी है। आयोग ने इन मामलों में अभियोजन स्वीकृति आदेश की प्रति अपीलकर्ता को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
जांच पूरी होने तक कुछ दस्तावेज रहेंगे गोपनीय
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक जांच जारी है और उससे गिरफ्तारी, अभियोजन या जांच प्रभावित होने की आशंका है, तब तक कुछ दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किए जाएंगे। हालांकि आयोग ने साफ कहा कि राज्य गठन के बाद जिन अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हुए हैं, उनकी जानकारी छिपाई नहीं जा सकती। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि ED, CBI या अन्य केंद्रीय एजेंसियों से जुड़े मामलों की सुनवाई का अधिकार केंद्रीय सूचना आयोग के पास होगा।