ब्रिडकुल के एमडी एनपी सिंह के खिलाफ एक निजी कंपनी ने शपथ पत्र के माध्यम से भ्रष्टाचार से जुड़े गंभीर आरोप दर्ज कराए थे। इसके बाद उच्च स्तर पर मंथन करते हुए शासन ने एनपी सिंह को पद से हटाने का फैसला लिया।
-
राज्य समीक्षा डेस्क
-
Advertisement
जहां आज भी सिर्फ चरवाहे जाते हैं – केदार हिमालय के अनदेखे ट्रेक्स
प्रकृति, शांति और हिमालय – केदार के गुप्त ट्रेक्स.. यहां कदम रखते ही बदल जाती है सांस और सोच – Hidden Kedar Trails
Example Ads Media
Image: BRIDCUL MD faces corruption charges
देहरादून: उत्तराखंड की प्रमुख निर्माण एजेंसी ब्रिज रोपवे, टनल एंड अदर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BRIDCUL) एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। राज्य सरकार ने ब्रिडकुल के प्रबंध निदेशक एनपी सिंह के खिलाफ गंभीर शिकायतों के चलते बड़ा प्रशासनिक कदम उठाते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया है।
BRIDCUL MD faces corruption charges
जानकारी के अनुसार, ब्रिडकुल के एमडी एनपी सिंह के खिलाफ एक निजी कंपनी ने शपथ पत्र के माध्यम से भ्रष्टाचार से जुड़े गंभीर आरोप दर्ज कराए थे। यह शिकायत सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुँची, जहाँ प्रारंभिक जांच में इसे महत्वपूर्ण और गंभीर माना गया। इसके बाद उच्च स्तर पर मंथन करते हुए शासन ने एनपी सिंह को पद से हटाने का फैसला लिया। जारी आदेश में स्पष्ट उल्लेख है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप “अत्यंत गंभीर” हैं और इनकी निष्पक्ष व विस्तृत जांच जरूरी है। शासन का यह भी मानना है कि प्रबंध निदेशक जैसे ऊंचे पद पर बने रहने से जांच की पारदर्शिता प्रभावित हो सकती है, इसलिए उन्हें तत्काल प्रभाव से पदमुक्त किया गया है। जांच पूरी होने तक वे ब्रिडकुल में कोई जिम्मेदारी नहीं निभाएंगे। इसके साथ ही, राज्य सरकार इस पूरे मामले की जांच एक स्वतंत्र एजेंसी से कराने पर भी विचार कर रही है, ताकि पूरे प्रकरण में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनी रहे।
जून 2024 में हुए थे MD के पद पर नियुक्त
आपको बता दें कि जून 2024 में एनपी सिंह को ब्रिडकुल का प्रबंध निदेशक (MD) नियुक्त किया गया था। इससे पहले वे लोक निर्माण विभाग (PWD) में चीफ इंजीनियर के रूप में लंबे समय तक कार्यरत रहे और वहीं से सेवानिवृत्त हुए। जहां से सेवानिवृत्ति होने के बाद राज्य सरकार ने उनकी तकनीकी विशेषज्ञता और अनुभव को देखते हुए उन्हें ब्रिडकुल जैसी महत्वपूर्ण निर्माण एजेंसी की जिम्मेदारी सौंपी थी। उनके नेतृत्व में ब्रिडकुल कई प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं पर काम कर रहा था। लेकिन अब, उनके खिलाफ सामने आए गंभीर आरोपों ने न केवल उनके कार्यकाल को कठघरे में खड़ा कर दिया है, बल्कि एजेंसी की पारदर्शिता और उसकी विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। इन आरोपों के चलते विभाग की समग्र छवि प्रभावित हुई है और उच्च स्तर पर लिए गए निर्णयों पर भी नई चर्चाएँ शुरू हो गई हैं।
उत्तराखंड की महत्वपूर्ण सरकारी एजेंसी
ब्रिडकुल उत्तराखंड की उन चुनिंदा और महत्वपूर्ण सरकारी एजेंसियों में शामिल है, जो राज्य के बड़े और रणनीतिक अवसंरचना प्रोजेक्ट्स का संचालन करती है। इसमें पुलों का निर्माण, रोपवे विकसित करना, सुरंग परियोजनाएँ और अन्य जटिल इंजीनियरिंग कार्य शामिल हैं। स्वाभाविक रूप से, इतनी महत्वपूर्ण एजेंसी के शीर्ष पद पर बैठे अधिकारी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगना पूरे विभाग की छवि और उसकी कार्य-प्रणाली पर सीधा प्रभाव डालते हैं। वर्तमान स्थिति में पूरा मामला विभागीय जांच और संभवतः किसी स्वतंत्र एजेंसी द्वारा कराई जाने वाली विस्तृत जांच पर निर्भर करेगा।