उत्तराखंड: सतोपंथ-स्वर्गारोहिणी ट्रेक पर्यटकों के लिए खुला, अब कर सकेंगे पांडवों के स्वर्ग मार्ग की रोमांचक यात्रा

चमोली जिले में स्थित सतोपंथ-स्वर्गारोहिणी ट्रेक पर्यटकों के लिए खोल दिया गया है। पांडवों की स्वर्ग यात्रा से जुड़ा यह 26 किमी लंबा ट्रेक धार्मिक आस्था, प्राकृतिक सौंदर्य और रोमांच का अनूठा संगम है।
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Trails once used by sages, locals, and shepherds. Ideal for travelers seeking silence over social media fame.

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Satopanth Trek Open 2026: Satopanth-Swargarohini Trek Opens for Tourists in Chamoli
Image: Satopanth-Swargarohini Trek Opens for Tourists in Chamoli

चमोली: चीन सीमा के निकट स्थित सतोपंथ-स्वर्गारोहिणी ट्रेक पर्यटकों के लिए खोल दिया गया है। ट्रेक के निरीक्षण के लिए नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क के अधिकारी-कर्मचारियों, विशेषज्ञों और पर्यटकों का एक दल सतोपंथ पहुंचा था, जो शुक्रवार को वापस लौट आया। इसके बाद ट्रेक को आधिकारिक रूप से पर्यटकों के लिए खोल दिया गया।

Satopanth-Swargarohini Trek Opens for Tourists in Chamoli

अब पर्यटक 14,260 फीट से लेकर 15,100 फीट तक की ऊंचाई से गुजरने वाले 26 किलोमीटर लंबे इस दुर्गम लेकिन रोमांचक ट्रेक का आनंद ले सकते हैं। पार्क अधिकारियों के अनुसार, अब तक 30 पर्यटक ट्रेक के लिए पंजीकरण करा चुके हैं। ट्रेक के दौरान अधिकांश स्थानों पर पर्यटकों को बर्फ के बीच से होकर गुजरना होगा।

पांडवों के स्वर्गारोहण से जुड़ी है मान्यता

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बदरीनाथ धाम से लगभग तीन किलोमीटर आगे स्थित भारत के प्रथम गांव माणा से शुरू होने वाले इसी मार्ग से पांडव एक श्वान के साथ स्वर्ग की ओर गए थे। कहा जाता है कि स्वर्गारोहिणी यात्रा के दौरान सबसे पहले माणा में भीम पुल के पास द्रौपदी ने शरीर त्यागा। इसके बाद आठ किलोमीटर आगे लक्ष्मी वन में नकुल ने प्राण त्यागे। वहां से छह किलोमीटर आगे नीलकंठ पर्वत के नीचे स्थित सहस्रधारा में सहदेव ने देह छोड़ी। इसके बाद छह किलोमीटर आगे चक्रतीर्थ में अर्जुन ने अपना शरीर त्याग दिया। चक्रतीर्थ से लगभग छह किलोमीटर की दूरी पर स्थित सतोपंथ झील तक पहुंचने के लिए सतोपंथ ग्लेशियर और पार्वती ग्लेशियर की कठिन राह पार करनी पड़ती है। मान्यता है कि झील के किनारे भीम ने भी शरीर त्याग दिया था। इसके बाद केवल धर्मराज युधिष्ठिर ही एक श्वान के मार्गदर्शन में सशरीर स्वर्ग पहुंच सके।

सतोपंथ झील का धार्मिक महत्व

सतोपंथ झील ट्रेक का प्रमुख आकर्षण है, जहां पहुंचकर अधिकांश ट्रेकर अपनी यात्रा का समापन करते हैं। धार्मिक कथाओं के अनुसार, यहां तक पहुंचते-पहुंचते पांडवों का मार्गदर्शन कर रहे श्वान के पैरों में कीड़े पड़ गए थे। तब युधिष्ठिर ने झील के जल से उसके पैरों की सफाई की थी। इसी कारण आज भी झील में छोटे-छोटे कीड़े तैरते हुए दिखाई देने की मान्यता प्रचलित है। त्रिकोणाकार आकार वाली इस झील के बारे में यह भी कहा जाता है कि इसके तीनों कोनों में ब्रह्मा, विष्णु और महेश का निवास है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, एकादशी और पूर्णिमा के दिन त्रिदेव यहां स्नान करने आते हैं। आगे पढ़िए..

स्वर्गारोहिणी पास और स्वर्ग की सीढ़ी

सतोपंथ झील से लगभग 16 किलोमीटर आगे समुद्र तल से 20,506 फीट की ऊंचाई पर स्वर्गारोहिणी पास स्थित है। मान्यता है कि यहां बर्फ के बीच दिखाई देने वाली सीढ़ीनुमा आकृति ही स्वर्ग की सीढ़ी है। स्वर्गारोहिणी का पहला सफल आरोहण वर्ष 1990 में नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (निम) की टीम ने किया था। यह भी कहा जाता है कि इससे पहले ब्रिटिश पर्वतारोही एरिक शिपटन भी स्वर्गारोहिणी तक पहुंच चुके थे। सतोपंथ से आगे चंद्र कुंड, सूर्य कुंड और विष्णु कुंड जैसी पवित्र झीलें भी स्थित हैं, जो इस क्षेत्र के धार्मिक और प्राकृतिक महत्व को और बढ़ाती हैं।

ट्रेकिंग के लिए अनुमति और स्वास्थ्य परीक्षण अनिवार्य

स्वर्गारोहिणी क्षेत्र की ट्रेकिंग सामान्यतः सतोपंथ झील तक ही की जाती है। यहीं से पर्यटक दूर से स्वर्ग की सीढ़ी के दर्शन करते हैं। ट्रेक पर जाने के लिए नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क प्रशासन से अनुमति लेना अनिवार्य है। यह अनुमति ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से प्राप्त की जा सकती है। हालांकि अनुमति से पहले पर्यटकों को ज्योतिर्मठ में अनिवार्य स्वास्थ्य परीक्षण कराना होता है। ट्रेक के दौरान पर्यटकों के लिए टूर ऑपरेटर और गाइड साथ ले जाना जरूरी है। टेंट, भोजन और ऑक्सीजन जैसी आवश्यक व्यवस्थाएं पर्यटकों को स्वयं करनी होती हैं। पूरा ट्रेक लगभग पांच दिनों में पूरा किया जाता है।

26 किलोमीटर लंबा है सतोपंथ ट्रेक

सतोपंथ ट्रेक की शुरुआत तक पहुंचने के लिए सबसे पहले ऋषिकेश से लगभग 247 किलोमीटर की यात्रा कर ज्योतिर्मठ पहुंचना पड़ता है। इसके बाद ज्योतिर्मठ से 47.2 किलोमीटर दूर माणा गांव स्थित है, जहां से 26 किलोमीटर लंबा पैदल ट्रेक शुरू होता है। ज्योतिर्मठ स्थित स्नो लाइन ट्रेकर्स एजेंसी के संचालक सोहन सिंह बिष्ट के अनुसार, नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क प्रशासन ट्रेकिंग के लिए प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 100 रुपये शुल्क लेता है। इसके अतिरिक्त पोर्टर और गाइड का शुल्क 320 रुपये प्रतिदिन तथा टेंट का शुल्क 450 रुपये प्रतिदिन निर्धारित किया गया है।

रोमांच और आस्था का अनोखा संगम

सतोपंथ-स्वर्गारोहिणी ट्रेक केवल एक साहसिक यात्रा नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था, पौराणिक इतिहास और हिमालयी प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत संगम भी है। बर्फीले ग्लेशियरों, ऊंचे पर्वतों और पौराणिक स्थलों से होकर गुजरने वाला यह ट्रेक हर वर्ष देश-विदेश के साहसिक पर्यटकों और श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है।