उत्तरकाशी के निर्माणाधीन सिल्क्यारा-बड़कोट टनल में कंक्रीट लाइनिंग का ब्लॉक गिरने से 21 वर्षीय मजदूर की मौत हो गई। NHIDCL ने मामले की जांच शुरू कर दी है। यह वही सुरंग है जहां 2023 में 41 मजदूर 17 दिन तक फंसे रहे थे।
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राज्य समीक्षा डेस्क
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Image: Worker Killed After Concrete Block Collapse in Uttarkashi
उत्तरकाशी: उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में निर्माणाधीन सिल्क्यारा-बड़कोट सुरंग में बुधवार-गुरुवार की रात एक दर्दनाक हादसा हो गया। टनल की कंक्रीट लाइनिंग का एक ब्लॉक टूटकर गिरने से उसकी चपेट में आए 21 वर्षीय मजदूर की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद निर्माण स्थल पर हड़कंप मच गया और संबंधित एजेंसियों ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
Silkyara Tunnel Accident: Worker Killed After Concrete Block Collapse in Uttarkashi
जिला आपदा प्रबंधन केंद्र के प्रभारी शार्दूल गुसांई के अनुसार, हादसा रात करीब 2 बजे हुआ। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, बड़कोट साइड से लगभग 900 मीटर अंदर टनल की कंक्रीट लाइनिंग का एक हिस्सा अचानक टूटकर गिर गया। इस दौरान वहां कार्य कर रहा झारखंड निवासी 21 वर्षीय मजदूर उसकी चपेट में आ गया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
जांच के बाद सामने आएंगे हादसे के कारण
अधिकारियों ने बताया कि घटना की विस्तृत जांच नेशनल हाईवे एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHIDCL) द्वारा की जा रही है। फिलहाल दुर्घटना के वास्तविक कारणों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि हादसा किन परिस्थितियों में हुआ और क्या सुरक्षा मानकों में किसी प्रकार की कमी थी। इस हादसे के बाद एक बार फिर सिल्क्यारा-बड़कोट सुरंग वर्ष 2023 की उस बड़ी दुर्घटना को लेकर चर्चा में आ गई है, जब 12 नवंबर 2023 को सुरंग का एक हिस्सा ढहने से 41 मजदूर अंदर फंस गए थे। यह सुरंग चारधाम ऑल वेदर रोड परियोजना का हिस्सा है और इसका उद्देश्य यमुनोत्री तथा गंगोत्री धाम के बीच सड़क संपर्क को बेहतर बनाना है। आगे पढ़िए..
17 दिन तक चला था ऐतिहासिक रेस्क्यू अभियान
साल 2023 में हुए हादसे के बाद फंसे मजदूरों तक पाइप के माध्यम से ऑक्सीजन, भोजन, पानी और दवाइयां पहुंचाई गई थीं। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सेना, बीआरओ, एनएचआईडीसीएल और कई विशेषज्ञ एजेंसियों ने संयुक्त रूप से राहत अभियान चलाया। रेस्क्यू के दौरान अमेरिकी ऑगर मशीन से ड्रिलिंग की गई, लेकिन तकनीकी दिक्कत आने के बाद रैट-होल माइनर्स ने बेहद संकरी जगह में हाथों से खुदाई कर रास्ता बनाया। करीब 17 दिन तक चले इस कठिन अभियान के बाद 28 नवंबर 2023 को सभी 41 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया था। इस सफल अभियान की देश और विदेश में व्यापक सराहना हुई थी।
सुरक्षा मानकों पर फिर उठे सवाल
ताजा हादसे के बाद निर्माणाधीन सुरंगों में श्रमिकों की सुरक्षा, गुणवत्ता नियंत्रण और आपातकालीन व्यवस्थाओं को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। फिलहाल संबंधित एजेंसियां घटना की जांच कर रही हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई और सुरक्षा उपायों पर निर्णय लिया जाएगा।