Uttarakhand News: बर्खास्त करेगी पुलिस, जंतर-मंतर पर बयान देने वाले सस्पेंड कांस्टेबल शेर सिंह पर एक्शन

जंतर-मंतर पर वायरल वीडियो के बाद उत्तराखंड पुलिस ने निलंबित कांस्टेबल शेर सिंह के खिलाफ कानूनी और विभागीय कार्रवाई तेज कर दी है। पुलिस के अनुसार वह पहले से निलंबित है और उसके खिलाफ बर्खास्तगी की प्रक्रिया जारी है।
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Sher Singh Constable News: Suspended Uttarakhand Constable Faces Fresh Action
Image: Suspended Uttarakhand Constable Faces Fresh Action

देहरादून: दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन और पेपर लीक मुद्दे को लेकर दिए गए बयानों के बाद उत्तराखंड पुलिस ने निलंबित पुलिस कांस्टेबल शेर सिंह के खिलाफ कानूनी और विभागीय कार्रवाई तेज कर दी है। पुलिस का कहना है कि शेर सिंह पहले से ही निलंबित है और उसके खिलाफ बर्खास्तगी की प्रक्रिया चल रही है। हाल ही में वायरल हुए वीडियो में वह एक राजनीतिक संगठन के समर्थन में मंच से संबोधन करते और अपना पुलिस बैज उतारते हुए दिखाई दिया।

Suspended Uttarakhand Constable Faces Fresh Action

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में शेर सिंह दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित कार्यक्रम में मंच से संबोधित करते नजर आ रहे हैं। वीडियो में उन्होंने एक राजनीतिक संगठन के समर्थन की घोषणा की और सार्वजनिक रूप से अपना पुलिस बैज उतारकर संगठन के संस्थापक को सौंप दिया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि यदि न्याय के लिए आवाज उठाना बगावत है, तो वह खुद को बागी मानते हैं। साथ ही उन्होंने पुलिस सेवा छोड़ने की बात भी कही।

उत्तराखंड पुलिस ने जारी किया आधिकारिक पक्ष

उत्तराखंड पुलिस के अनुसार, शेर सिंह पहले से ही एक गंभीर आपराधिक मामले में आरोपी हैं और 28 जून 2026 से बिना अनुमति अपने कार्यस्थल से अनुपस्थित थे। पुलिस के मुताबिक, पिथौरागढ़ के पुलिस अधीक्षक द्वारा उन्हें नोटिस जारी किया गया था, लेकिन निर्धारित समय में कोई जवाब नहीं मिलने पर 20 जुलाई 2026 को उन्हें निलंबित कर दिया गया। आगे पढ़िए..

आईजी कुमाऊं ने बताई पूरी स्थिति

आईजी कुमाऊं रेंज निवेदिता कुकरेती के अनुसार, शेर सिंह के वायरल बयान और गतिविधियों को गंभीरता से लिया गया है। उन्होंने बताया कि शेर सिंह का पहले से आपराधिक इतिहास रहा है और वह वर्ष 2025 में दर्ज एक गंभीर आपराधिक मामले में आरोपी है। इसी मामले के आधार पर उसके खिलाफ विभागीय स्तर पर बर्खास्तगी की प्रक्रिया पहले से जारी थी। आईजी ने यह भी कहा कि वायरल बयानों के संबंध में आवश्यक कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जा रही है।

भूमि कब्जाने वाले गिरोह से संबंध होने का आरोप

पुलिस के अनुसार, शेर सिंह पर आरोप है कि वह कुछ अन्य लोगों के साथ मिलकर कथित रूप से संगठित अपराध में शामिल था। जांच एजेंसियों के अनुसार, समूह पर लोगों को कथित रूप से डराने-धमकाने, विवादित संपत्तियों से लाभ उठाने और जमीन कब्जाने जैसे आरोप हैं। इन मामलों की जांच और न्यायिक प्रक्रिया जारी है।

2025 में हुआ था मामला दर्ज

पुलिस के अनुसार, वर्ष 2025 में हरिद्वार में दर्ज एक मामले में शेर सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। बाद में वह जमानत पर रिहा हुआ। विभाग का आरोप है कि उसने पुलिसकर्मी रहते हुए अपने पद का दुरुपयोग किया। इन्हीं मामलों के आधार पर उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू की गई थी। उत्तराखंड पुलिस ने स्पष्ट किया है कि शेर सिंह वर्तमान में सक्रिय पुलिस सेवा में नहीं है। विभागीय जांच के साथ-साथ उसके हालिया सार्वजनिक बयानों और गतिविधियों के संबंध में भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जा रही है।