उत्तराखंड के पांच शिक्षकों के वर्ष 2024 के UTET प्रथम के अंकपत्र और प्रमाण पत्र जांच में फर्जी पाए गए हैं। मामले के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा है और अब संबंधित शिक्षकों पर विभागीय व कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
-
राज्य समीक्षा डेस्क
-
Advertisement
Untouched Trekking Routes in Kedar Himalaya, Uttarakhand
Lesser-known treks offering breathtaking Himalayan views. A perfect blend of adventure, solitude, and spirituality.
Example Ads Media
Image: Uttarakhand kapkot 5 teachers fake utet certificates
बागेश्वर: उत्तराखंड के शिक्षा विभाग में फर्जी दस्तावेजों के सहारे सरकारी नौकरी हासिल करने का गंभीर मामला सामने आया है। बागेश्वर जिले के कपकोट ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत पांच शिक्षकों के उत्तराखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (UTET) प्रथम के प्रमाण पत्र विभागीय सत्यापन में फर्जी पाए गए हैं। शिक्षकों के शैक्षणिक और अर्हता प्रमाण पत्रों के नियमित सत्यापन अभियान के दौरान यह मामला सामने आया। उप शिक्षा अधिकारी, प्राथमिक शिक्षा कपकोट की ओर से संबंधित शिक्षकों के UTET प्रमाण पत्रों की छायाप्रतियां सत्यापन के लिए उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद, रामनगर भेजी गई थीं।
Uttarakhand Kapkot 5 teachers fake UTET certificates
उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद, रामनगर ने संबंधित प्रमाण पत्रों का बोर्ड के मूल अभिलेखों और सारणियन पंजिका से मिलान किया। परिषद की ओर से 10 अगस्त 2026 को जारी जांच आख्या में बताया गया कि वर्ष 2024 के UTET प्रथम से संबंधित इन अंकपत्रों और रोल नंबरों का बोर्ड के रिकॉर्ड में कोई उल्लेख नहीं मिला। बोर्ड की जांच में संबंधित पाँचों अभ्यर्थियों के नाम और रोल नंबर मूल रिकॉर्ड में दर्ज नहीं पाए गए। परिषद ने स्पष्ट किया कि इन अभ्यर्थियों के UTET प्रथम के अंकपत्र और प्रमाण पत्र बोर्ड की ओर से जारी नहीं किए गए हैं।
इन पांच शिक्षकों के प्रमाण पत्र निकले फर्जी
अरविंद कुमार पुत्र महेश चंद्र — अनुक्रमांक: 1242351885
संजय कुमार पुत्र प्रताप राम — अनुक्रमांक: 1243012741
रजनी पुत्री कुंदन लाल — अनुक्रमांक: 1242301755
लक्ष्मी आर्या पुत्री कुंवर राम — अनुक्रमांक: 1242622358
रोहित कुमार पुत्र खग राम — अनुक्रमांक: 1242351918
सभी प्रमाण पत्र वर्ष 2024 के UTET प्रथम से संबंधित बताए गए हैं। आगे पढ़िए..
कैसे हुआ फर्जी प्रमाण पत्रों का सत्यापन?
इस मामले ने शिक्षा विभाग की नियुक्ति और दस्तावेज़ सत्यापन प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि संबंधित शिक्षकों के UTET प्रमाण पत्र बोर्ड के रिकॉर्ड में मौजूद ही नहीं थे, तो नियुक्ति के समय इन दस्तावेजों का सत्यापन किस स्तर पर किया गया। अब विभाग के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर नियुक्ति प्रक्रिया कैसे पूरी हुई और संबंधित शिक्षक कितने समय तक सरकारी सेवा में बने रहे।
निलंबन और वेतन रिकवरी की तैयारी
मामला सामने आने के बाद संबंधित शिक्षकों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संभावना बढ़ गई है। विभागीय स्तर पर निलंबन, वेतन की रिकवरी और धोखाधड़ी से जुड़े मामले में कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू किए जाने की चर्चा है। हालांकि, अंतिम कार्रवाई विभागीय जांच और सक्षम अधिकारियों के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगी।
कपकोट शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी उठे सवाल
पांच शिक्षकों के फर्जी UTET प्रमाण पत्र सामने आने के बाद कपकोट शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। खासकर यह सवाल महत्वपूर्ण है कि नियुक्ति के समय प्रमाण पत्रों का सत्यापन क्यों नहीं हुआ। स्थानीय स्तर पर पहले भी विभागीय कार्रवाई को लेकर सवाल उठते रहे हैं। हाल ही में एक अशासकीय विद्यालय के क्लर्क को कथित तौर पर गलत तरीके से अटैच किए जाने के मामले में शिक्षा मंत्री की ओर से जांच के निर्देश दिए गए थे। आरोप है कि निर्देश के बावजूद जांच रिपोर्ट में देरी हुई। अब पांच शिक्षकों के फर्जी UTET प्रमाण पत्रों के मामले में शिक्षा विभाग क्या कार्रवाई करता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।
अंकपत्र और प्रमाण पत्र बोर्ड द्वारा जारी नहीं किए गए
उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद, रामनगर के सचिव विनोद कुमार ढौंढियाल के अनुसार, शिक्षकों के सत्यापन प्रकरण में प्राप्त प्रमाण पत्रों की छायाप्रतियों का परिषद की मूल सारणियन पंजिका से मिलान कराया गया। जांच में पांचों अभ्यर्थियों के रोल नंबर और नाम बोर्ड के रिकॉर्ड में दर्ज नहीं पाए गए। परिषद की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि संबंधित अभ्यर्थियों के UTET प्रथम के अंकपत्र और प्रमाण पत्र बोर्ड द्वारा जारी नहीं किए गए हैं और ये दस्तावेज कूट रचित हैं। इसकी रिपोर्ट उप शिक्षा अधिकारी कपकोट को भेज दी गई है।
फर्जी UTET प्रमाण पत्रों की विभागीय जांच
फर्जी UTET प्रमाण पत्रों की आधिकारिक पुष्टि के बाद अब विभागीय जांच में यह पता लगाया जाना जरूरी होगा कि इन दस्तावेजों का इस्तेमाल नियुक्ति के किस चरण में किया गया। साथ ही यह भी जांच का विषय होगा कि सत्यापन प्रक्रिया में किसी स्तर पर लापरवाही हुई या किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका रही। मामले में यदि विभागीय जांच में आरोप प्रमाणित होते हैं, तो संबंधित शिक्षकों पर सेवा नियमों के तहत कार्रवाई के साथ-साथ लागू कानूनों के अनुसार कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।