Uttarakhand High Court ने गोविंदघाट हेलीपैड के अस्थाई अधिग्रहण को गैरकानूनी करार देते हुए आदेश रद्द कर दिए। चमोली DM को 15 दिन में डेक्कन चार्टर्स को कब्जा लौटाने के निर्देश।
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राज्य समीक्षा डेस्क
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Image: High Court Cancels Govindghat Helipad Acquisition Order
चमोली: जनपद चमोली के गोविंदघाट स्थित हेलीपैड को लेकर उत्तराखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने जिला प्रशासन की ओर से किए गए हेलीपैड के अस्थाई अधिग्रहण को कानून और निर्धारित प्रक्रिया के खिलाफ माना है।
Uttarakhand High Court Cancels Govindghat Helipad Acquisition Order
न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी की एकलपीठ ने चमोली जिला प्रशासन की ओर से 23 मई 2024 और 27 जून 2025 को जारी किए गए अधिग्रहण आदेशों को निरस्त कर दिया।
बिना उचित नोटिस के संपत्ति का अधिग्रहण गलत
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि भूमि अधिग्रहण एवं पुनर्वास अधिनियम, 2013 की धारा 81(2) के तहत किसी संपत्ति के अस्थाई अधिग्रहण से पहले प्रभावित व्यक्ति या पक्ष को लिखित नोटिस देना और पर्याप्त समय प्रदान करना जरूरी है। अदालत के अनुसार, इस मामले में प्रशासन ने निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया। कोर्ट ने स्पष्ट टिप्पणी की कि महज 24 घंटे का समय देकर या बिना पूर्व सूचना के किसी संपत्ति पर कब्जा लेना कानून के अनुरूप नहीं है।
2011 से हेलीकॉप्टर सेवा संचालित कर रही थी कंपनी
यह मामला मेसर्स डेक्कन चार्टर्स प्राइवेट लिमिटेड की ओर से दाखिल रिट याचिकाओं से जुड़ा है। कंपनी वर्ष 2011 से गोविंदघाट से श्री हेमकुंड साहिब के लिए हेलीकॉप्टर सेवाएं संचालित कर रही थी। कंपनी ने निजी भूस्वामियों से जमीन लीज पर लेकर वहां हेलीपैड और यात्रियों के लिए लाउंज विकसित किया था। बताया गया कि इसके निर्माण और विकास में कंपनी ने काफी राशि खर्च की थी।
यात्रा सीजन में प्रशासन ने लिया था कब्जा
मई 2024 में चारधाम और हेमकुंड साहिब यात्रा शुरू होने के दौरान नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण और चमोली जिला प्रशासन ने आपात स्थिति और जनहित का हवाला देते हुए हेलीपैड पर कब्जा ले लिया था। आरोप के अनुसार, प्रशासन ने हेलीपैड का ताला तोड़कर उसका संचालन पवन हंस लिमिटेड को सौंप दिया था। राज्य सरकार की ओर से अदालत में तर्क दिया गया कि यात्रा सीजन में जनहित और आपात परिस्थितियों को देखते हुए यह कदम आवश्यक था। साथ ही सरकार ने कंपनी की लीज अवधि के पंजीकरण को लेकर भी सवाल उठाए।
अपंजीकृत लीज के बावजूद कंपनी 'हितबद्ध व्यक्ति'
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के तर्क को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि लीज के पंजीकरण की स्थिति अलग विषय है, लेकिन कंपनी उस संपत्ति पर वास्तविक कब्जे में थी। कोर्ट ने 2013 के अधिनियम की धारा 3(एक्स) का उल्लेख करते हुए कहा कि कंपनी 'हितबद्ध व्यक्ति' की श्रेणी में आती है। इसलिए उसे अधिग्रहण से पहले नोटिस देने और अपना पक्ष रखने का कानूनी अधिकार था।
15 दिन में कंपनी को लौटाना होगा हेलीपैड
हाईकोर्ट ने चमोली के जिलाधिकारी को महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं।
अदालत ने कहा है कि 15 दिनों के भीतर गोविंदघाट हेलीपैड का पूरा नियंत्रण वापस दिया जाए।
हेलीपैड का कब्जा याचिकाकर्ता कंपनी को सौंपा जाए।
कार्रवाई पूरी होने के बाद कोर्ट में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल की जाए।
अवैध अधिग्रहण की पूरी अवधि के लिए कंपनी को उचित मुआवजा दिया जाए।
कंपनी को मिलेगा मुआवजा और लैंडिंग शुल्क
कोर्ट ने अवैध अधिग्रहण की अवधि के लिए कंपनी को उचित भुगतान करने के भी निर्देश दिए हैं। मुआवजे और लैंडिंग शुल्क का निर्धारण यूकेएडीए की हेलीपैड नीति 2023-24 और लैंडिंग दर सूची 2018 में निर्धारित बाजार दरों के आधार पर करने को कहा गया है।