ऊपरी यमुना बेसिन की 660 मेगावाट क्षमता वाली किशाऊ बांध परियोजना को लेकर उत्तराखंड समेत छह राज्यों के बीच अहम समझौता हुआ है।नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में छह राज्यों ने परियोजना से जुड़े समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए।
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राज्य समीक्षा डेस्क
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Image: Kishau Dam Project Six States Sign MoU in Presence of Amit Shah
देहरादून: किशाऊ बांध परियोजना को लेकर लंबे समय से चल रही अंतरराज्यीय प्रक्रिया अब एक महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंच गई है। मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित अहम बैठक में उत्तराखंड समेत 6 राज्यों के बीच परियोजना से संबंधित समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।
Kishau Dam Project: Six States Sign MoU in Presence of Amit Shah
बैठक केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई, जिसमें छह राज्यों के प्रतिनिधियों ने परियोजना से जुड़े समझौते को अंतिम रूप दिया। ऊपरी यमुना बेसिन में प्रस्तावित किशाऊ बांध परियोजना की क्षमता 660 मेगावाट है। करीब 15,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली यह परियोजना क्षेत्र की महत्वपूर्ण जल एवं ऊर्जा परियोजनाओं में शामिल है। परियोजना का उद्देश्य सिर्फ बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए जल संरक्षण, पेयजल आपूर्ति और सिंचाई जैसी जरूरतों को भी पूरा करने की योजना है।
छह राज्यों के बीच हुआ समझौता
किशाऊ परियोजना से सीधे जुड़े छह राज्यों—हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान—के बीच MoU पर हस्ताक्षर होने से परियोजना के आगे बढ़ने का रास्ता मजबूत हुआ है। यह समझौता ऊपरी यमुना बेसिन में जल संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल और राज्यों के बीच समन्वय की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
1,324 मिलियन घन मीटर होगी जल भंडारण क्षमता
प्रस्तावित किशाऊ बांध की जल भंडारण क्षमता 1,324 मिलियन घन मीटर बताई गई है। इतनी बड़ी भंडारण क्षमता के कारण परियोजना को ऊपरी यमुना बेसिन में जल प्रबंधन के लिहाज से अहम माना जा रहा है। परियोजना के जरिए पानी के संरक्षण के साथ-साथ विभिन्न राज्यों की पेयजल और सिंचाई संबंधी जरूरतों को पूरा करने पर जोर रहेगा।
बिजली उत्पादन के साथ सिंचाई और पेयजल पर जोर
किशाऊ बांध परियोजना को बहुउद्देशीय परियोजना के तौर पर विकसित किया जाना प्रस्तावित है। इसके प्रमुख उद्देश्यों में जल संरक्षण, पेयजल उपलब्धता, सिंचाई और बिजली उत्पादन शामिल हैं। 660 मेगावाट बिजली उत्पादन की क्षमता वाली इस परियोजना से ऊर्जा क्षेत्र को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।
लंबे समय से चल रही थी राज्यों के बीच प्रक्रिया
किशाऊ बांध परियोजना को लेकर संबंधित राज्यों के बीच लंबे समय से विभिन्न स्तरों पर प्रक्रिया चल रही थी। अब छह राज्यों के बीच MoU पर हस्ताक्षर होने से परियोजना को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। नई दिल्ली में हुई बैठक में राज्यों की भागीदारी और केंद्र की मौजूदगी में समझौते को अंतिम रूप दिया गया।
परियोजना की प्रमुख बातें
परियोजना: किशाऊ बांध परियोजना
क्षमता: 660 मेगावाट
क्षेत्र: ऊपरी यमुना बेसिन
अनुमानित लागत: करीब ₹15,000 करोड़
जल भंडारण क्षमता: 1,324 मिलियन घन मीटर
संबंधित राज्य: हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान
प्रमुख उद्देश्य: जल संरक्षण, पेयजल, सिंचाई और बिजली उत्पादन
किशाऊ परियोजना से जुड़े इस समझौते को ऊपरी यमुना बेसिन में जल और ऊर्जा संसाधनों के बेहतर प्रबंधन की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।