उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव तय समय से पहले होने की चर्चाएं तेज हैं। जनगणना 2027 और चुनावी कार्यक्रम को लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों ने संगठनात्मक तैयारियां तेज कर दी हैं। अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
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राज्य समीक्षा डेस्क
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Image: Assembly elections in Uttarakhand could be held early
देहरादून: उत्तराखंड की राजनीति में इन दिनों एक नई चर्चा जोर पकड़ रही है। राजनीतिक गलियारों में यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि राज्य में विधानसभा चुनाव निर्धारित समय से कुछ महीने पहले कराए जा सकते हैं। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन जनगणना 2027 और चुनावी कार्यक्रम के संभावित टकराव को लेकर राजनीतिक स्तर पर मंथन जारी होने की चर्चा है। इसी बीच भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों ने अपने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में गतिविधियां तेज कर दी हैं, जिससे आगामी चुनावों की तैयारियों के संकेत मिल रहे हैं।
Early Uttarakhand Assembly Elections? BJP and Congress Step Up Preparations
सूत्रों के अनुसार, वर्ष 2027 में प्रस्तावित जनगणना और विधानसभा चुनाव लगभग एक ही समयावधि में होने की संभावना को देखते हुए व्यवस्थागत चुनौतियों पर विचार किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि जनगणना और चुनावी प्रक्रिया में बड़ी संख्या में शिक्षक और सरकारी कर्मचारी शामिल होते हैं। ऐसे में दोनों बड़े कार्य एक साथ होने पर प्रशासनिक दबाव बढ़ सकता है। इसी कारण कुछ राजनीतिक हलकों में विधानसभा चुनाव कुछ महीने पहले कराने का सुझाव चर्चा में है। हालांकि चुनाव की तिथियों का अंतिम निर्णय केवल भारत निर्वाचन आयोग द्वारा ही लिया जाता है और फिलहाल इस विषय में कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है।
भाजपा संगठन चुनावी मोड में
उत्तराखंड में सत्तारूढ़ भाजपा ने चुनावी तैयारियों को गति देना शुरू कर दिया है। पार्टी ने राज्य की सभी 70 विधानसभा सीटों के लिए कोर कमेटियों का गठन कर दिया है और बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने के लिए बैठकों का दौर जारी है। पार्टी का फोकस कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और प्रत्येक बूथ तक संगठन की पहुंच मजबूत करने पर है। भाजपा आगामी विधानसभा चुनाव में लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही है। आगे पढ़िए..
भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन का उत्तराखंड दौरा चर्चा में
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन पिछले कुछ दिनों से उत्तराखंड प्रवास पर रहे। मसूरी में कार्यकर्ताओं के साथ हुई बैठकों में उन्होंने संगठन को मजबूत करने और बूथ स्तर तक सक्रियता बढ़ाने पर जोर दिया। पार्टी सूत्रों के अनुसार, उन्होंने कार्यकर्ताओं से हर व्यक्ति तक पहुंच बनाने और संगठनात्मक मजबूती को प्राथमिकता देने की बात कही। बीते 20 दिनों में उनका यह दूसरा उत्तराखंड दौरा रहा, जिससे राजनीतिक हलकों में चुनावी तैयारियों की चर्चाएं और तेज हो गई हैं।
कांग्रेस भी मैदान में उतरी
वहीं मुख्य विपक्षी दल कुमारी शैलजा के आगामी उत्तराखंड दौरे को लेकर भी राजनीतिक गतिविधियां बढ़ गई हैं। प्रदेश प्रभारी 17 और 18 जून को राज्य के दो दिवसीय दौरे पर रहेंगी। इस दौरान वह जिलाध्यक्षों, फ्रंटल संगठनों और पार्टी पदाधिकारियों के साथ बैठकें कर संगठन की स्थिति की समीक्षा करेंगी। कांग्रेस नेतृत्व आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहा है।
दोनों दलों का फोकस संगठन और बूथ प्रबंधन पर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चाहे चुनाव समय पर हों या पहले, दोनों प्रमुख दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। भाजपा जहां बूथ प्रबंधन और संगठन विस्तार पर काम कर रही है, वहीं कांग्रेस कार्यकर्ताओं को सक्रिय कर चुनावी जमीन मजबूत करने की कोशिश में जुटी है। आने वाले महीनों में उत्तराखंड की राजनीति और अधिक गर्माने की संभावना है, क्योंकि सभी दल चुनावी रणनीतियों को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं।
राजनीतिक चर्चाओं के बावजूद यह स्पष्ट करना जरूरी है कि उत्तराखंड विधानसभा चुनाव तय समय से पहले कराने को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। चुनाव कार्यक्रम और तारीखों का अंतिम निर्णय भारत निर्वाचन आयोग द्वारा संवैधानिक प्रक्रिया के तहत लिया जाएगा। फिलहाल राज्य में केवल राजनीतिक गतिविधियां और संभावित चुनावी रणनीतियों को लेकर चर्चाएं तेज हैं।