उत्तराखंड के भुतहा गांव को सांसद अनिल बलूनी ने गोद लिया है। अब यहां रोजगार, कॉल सेंटर, बागवानी होगी। बाकी गांवों में भी ऐसा ही होगा और केंद्र सरकार मदद करेगी।
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आदिशा
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Image: Anil baluni work praised by central ministers
: उत्तराखंड से पलायन का दंश काफी पहले खत्म हो सकता था, लेकिन राजनैतिक शतरंज और सत्ता के लालच ने बीते 17 सालों में इस राज्य का बेडा गर्क कर दिया। वरना जो काम अभी हो रहे हैं, क्या वो पहले नहीं हो सकते थे? पलायन को जड़ खत्म करने के लिए एक सोच होनी चाहिए और उस सोच के साथ समाज जुड़ने लगता है। अब देखने को मिल रहा है कि वास्तव में कोई सांसद जमीनी स्तर पर कामों में जुटा है। जी हां हम बात कर रहे हैं अनिल बलूनी की। अनिल बलूनी के साथ साथ अब केंद्र सरकार भी उत्तराखंड के लिए हर संभव मदद करने के लिए तैयार है। जी हां अनिल बलूनी अब ऐसे गांव को गोद लेने जा रहे हैं, जहां लोग नहीं रहते। पौड़ी जिले के दुगड्डा में स्थित बौर गांव, जिसे भुतहा गांव कहते हैं। अनिल बलूनी का कहना है कि वो इस गांव को फिर बसाएंगे।
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बौर गांव से सीएससी और कॉल सेंटर चलेगा और स्थानीय लोगों को रोजगार मिल सकेगा। इसके बाद अलग अलग गांवों में इस तरह के काम शुरू होंगे। केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी इस काम में हर संभव मदद करने का ऐलान किया है और अनिल बलूनी की जमकर तारीफ की है। आप भी देखिए।
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इसके अलावा खास बात ये है कि केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने भी बलूनी के काम की तारीफ की है। उनका कहना है कि जल्द ही बौर गांव में केंद्र से एक टीम भेजी जाएगी। वहां खेती, बागवानी जैसी संभावनाओं के लिए मिट्टी का टेस्ट किया जाएगा।
उत्तराखंड की आत्मा गांवों में बसी है और ये आत्मा ही खत्म हो गई तो क्या फायदा? लंबे वक्त बाद ही सही किसी नेता ने इन गांवों में जमीनी स्तर पर काम करने का मन बनाया है।