उत्तराखंड के रक्तवन ग्लेशियर में एक चोटी ऐसी भी है, जिसका अभी तक नाम तय नहीं था। बताया जा रहा है कि इसका नाम पूर्व पीएम अटल जी के नाम पर रखा जाएगा।
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कपिल
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Image: unnamed peak of gangotri named as atal peak
: हाल ही में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी इस दुनिया को छोड़कर चले गए। अब उनके नाम पर उत्तराखंड की एक ऐसी चोटी का नामकरण हो रहा है, जिसका अभी तक नाम तय नहीं था। जी हां ये एक अनाम चोटी है, जो कि गंगोत्री धाम के रक्तवन ग्लेशियर से लगी है। बताया जा रहा है कि इस चोटी की ऊंचाई 6500 मीटर है। इस चोटी का नाम पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम रखा जाएगा। खबर है कि इसके लिए पर्यटन विभाग की एक टीम गांधी जयंती के मौके पर नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग मदद से इस चोटी पर आरोहण करेगी। इसके सफल आरोहण के बाद दस्तावेजों में इस चोटी का नाम ‘अटल चोटी’ रखा जाएगा। इस बारे में पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कुछ खास बातें बताई हैं। इस बारे में भी जानिए।
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पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने इस बारे में मीडिया से बातचीत में कहा कि ‘गंगोत्री घाटी में सुदर्शन पर्वत और सैफी के बीच एक अनाम चोटी है। ये चोटी रक्तवन ग्लेशियर पर मौजूद है और इसका नाम अब पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर रखा जाएगा। इसका नाम अटल चोटी होगा। बताया जा रहा है कि इस बारे में पर्यटन विकास परिषद के सदस्य अवधेश भट्ट ने पर्यटन मंत्री को प्रस्ताव दे दिया है। बताया जा रहा है कि इस प्रस्ताव को हरी झंडी भी दे दी गई है।’ दो अक्टूबर को एक टीम इस चोटी पर आरोहण के लिए रवाना होगी। इसके लिए एनआईएम यानी नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग से मदद ली जाएगी। इसी दौरान चोटी की ऊंचाई की वास्तविकता, रूट और कैंपिंग का भी पता लगाया जाएगा। इस टीम के वापस आने के बाद बड़ा काम होगा।
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टीम जब वापस लौटेगी तो सर्वे ऑफ इंडिया और इंडियन माउंटेनियरिंग फाउंडेशन को रिपोर्ट सौंपी दी जाएगी। इस टीम में एवरेस्ट पर विजय पताका फहराने वाले विश्वेश्वर सेमवाल भई होंगे। इस अभियान को एडवेंचर टूरिज्म में नई पहचान के रूप में भी देखा जा रहा है। कुल मिलाकर कहें तो उत्तराखंड की एक अनाम चोटी को अब नाम मिलने जा रहा है। बड़ी बात ये है कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर इस चोटी का नामकरण होगा। सरकार की तरफ से इसके लिए बकायदा बड़ी तैयारिंया कर दी गई हैं और अब आरोहण की तैयारियां हो रही हैं। माना जा रहा है कि इससे साहसिक पर्यटन को भी नई पहचान मिलेगी और पूर्व पीएम अटल जी की प्रकृति और पर्यावरण के प्रति आस्था को ये सच्ची श्रद्धांजलि साबित होगी।