उत्तराखंड में स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद का तप 110 दिनों से जारी है। 110 दिनों से बिना अन्न खाए स्वामी सानंद ने अब जल भी त्याग दिया है।
-
आदिशा
-
Advertisement
ऋषियों का मार्ग: केदार हिमालय के इन ट्रेक्स पर शोर नहीं, सिर्फ मंत्र सुनाई देते हैं
प्रकृति से जुड़ने और आत्मिक शांति पाने का अवसर। केदार हिमालय की वो यात्राएं जो ज़िंदगी भर याद रहती हैं।
Example Ads Media
Image: swami sananda tap in uttarakhand
: उत्तराखंड में बीते 110 दिनों से नदियों के लिए पूर्व प्रोफेसर ज्ञानस्वरूप सानंद लगातार 110 दिन से तप कर रहे हैं। 100 दिनों से बिना अन्न ग्रहण लिए स्वामी सानंद ने अब जल भी त्याग दिया है। इस वजह से उन्हें ऋषिकेश एम्स में भर्ती कराया गया है। प्रशासन ने आश्रम और उसके पास धारा 144 भी लागू कर दी थी। उनकी मांग है कि गंगा पर बन रही विद्युत परियोजनाओं को निरस्त किया जाए। इसके अलावा मंदाकिनी, भागीरथी, पिंडर, अलकनंदा, विष्णु गंगा और धौली गंगा नदी पर निर्माणाधीन जल विद्युत परियोजनाओं पर रोक लगाई जाए। उनकी मांग ये भी है कि गंगा क्षेत्र में वनों के कटान और खनन पर पूर्णरूप से रोक लगाई जाए। साथ ही ये मांग भी है कि गंगा से जुड़े अहम फैसलों के लिए गंगा भक्त परिषद का गठन हो।
यह भी पढें - उत्तराखंड में बड़ा हादसा..नींव खोदने के दौरान मलबे में दबे मजदूर, एक महिला की मौत
इस परिषद में गंगा के पहलु पर जानकारी रखने वाले विशेषज्ञों की टीम हो और सरकार या फिर ब्यूरोक्रेटस का हस्तक्षेप न हो। मांग पूरी न होने तक सानंद ने अन्न त्याग दिया। वो अब तक जल, नमक, नींबू और शहद ले रहे थे। लेकिन अब हैरानी की बात ये है कि उन्होंने जल भी त्याग दिया है। इसकी घोषणा सानंद द्वारा पहले ही कर ली गई थी। अब इस बात से प्रशासन के हाथ पांव फूल गए। डीएम दीपक रावत के निर्देश पर सिटी मजिस्ट्रेट और सीओ पुलिस बल के साथ पहुंचे। परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती से सानंद को ऋषिकेश में भर्ती होने का आग्रह किया। इसके बाद प्रशासन और डॉक्टर्स की टीम उन्हें ऋषिकेश एम्स लेकर चली गई। उधर सांनद का कहना है कि वो कोई उपचार नहीं लेंगे और उनका तप जारी रहेगा।
यह भी पढें - उत्तराखंड में 5 जिलों के लिए चेतावनी, अगले 24 घंटे ओलावृष्टि और बर्फबारी का अलर्ट!
डॉक्टर्स का इस बारे में कहना है कि जब तक इंसान के शरीर में कैलोरी की जरूरत पूरी होती रहती है तब तक वो बिना कुछ खाए 100 से ज्यादा दिन तक जिंदा रह सकता है। शरीर का वजन कम होने लगता है और कीटोन बढ़ने की समस्या पैदा हो जाती है। दूसरी तरफ मातृ सदन के ब्रह्मचारी दयानंद ने मीडिया को बताया कि सरकार को गंगा बचाने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वामी सानंद के तप से सरकार परेशान है लेकिन गंगा रक्षा के लिए कोई कदम बढ़ाने को तैयार नहीं हो रही है।