उत्तराखंड के सपूत प्रदीप रावत ने दो महीने पहले देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया था। उनकी बेटी हुई है, जो अपने पिता की छुअन को महसूस तक नहीं कर पाई।
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आदिशा
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Image: Daughter took birth in uttarakhand martyr family
देहरादून: उत्तराखंड का वीर सपूत दो महीने पहले सीमा पर शहीद हो गया था। उस दौरान देशभर के लोगों ने जब शहीद के परिवार के बारे में जाना तो सभी की आंखें भर आईं थी। ये कहानी है शहीद प्रदीप रावत की, जिनकी पत्नी गर्भवती थीं, घर में तीन बहने थीं और माता -पिता थे। शहादत से डेढ़ साल पहले ही प्रदीप रावत ने शादी की थी। जब वो शहीद हुए तो अपनी सात महीने की गर्भवती पत्नी और पेट में पल रही नन्ही जान को अकेला छोड़कर चले गए। अब शहीद के घर एक बहुत ही खूबसूरत बच्ची ने जन्म लिया है। ऋषिकेश एम्स में बच्ची ने जन्म लिया है। उस नन्हीं परी की किलकारियों से घर एक बार फिर से गूंज उठेगा। बस टीस ये ही है कि पिता साथ में नहीं हैं। आज प्रदीप रावत जिंदा होते तो घर का माहौल और खुशी कुछ और ही होती। बेटी की ये प्यारी सी तस्वीर देखिए
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प्रदीप रावत मूल रूप से टिहरी गढ़वाल के दोगी पट्टी के बमुंड गांव के थे। उनकी बेटी की ये तस्वीर देखिए।
अपने परिवार के इकलौते बेटे प्रदीप गढ़वाल राइफल की चौथी बटालियन में तैनात थे। ये जवान अपने दोस्तों के बीच फाइटर नाम से जाना जाता था। नए साल पर जनवरी में ही उनकी मैरिज एनिवर्सरी थी और वो इसके लिए घर आने वाले थे। प्रदीप रावत की तीन बहनों के लिए रक्षाबंधन का त्योहार भी सूना हो गया। 26 अगस्त को रक्षाबंधन था और इससे ठीक 13 दिन पहले तीन बहनों को ये दुख भरी खबर मिली। प्रदीप सिंह रावत चौथी
गढ़वाल राइफल में तैनात थे और इस वक्त जम्मू-कश्मीर के उड़ी सेक्टर में ड्यूटी पर थे। वो पेट्रोलिंग पर थे और इस दौरान एक बारूदी सुरंग फट गई। इससे वो गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके बाद उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती किया गया। अस्पताल में इलाज के दौरान ही इस वीर सपूत ने अपनी जान गंवा दी।
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बचपन में प्रदीप सिंह रावत अपने पिता को वर्दी में देखते थे, तो उनके दिल में देश के लिए और भी ज्यादा प्यार और सम्मान उमड़ता था। उनके पिता कुंवर सिंह रावत भी सेना में ही थे। फिलहाल उनका परिवार अपर गंगानगर ऋषिकेश में रह रहा था। अब प्रदीप रावत के घर में नन्हीं परी आई है। वो अपने पिता का प्यार तो नहीं पा सकेगी लेकिन अपने पिता की कहानियां पढ़ेगी, तो गर्व करेगी। वो अपने पिता की तस्वीर देखेगी, तो गर्व करेगी। प्रदीप अब इस परिवार के बीच नहीं हैं लेकिन उनकी कमी को ये नन्हीं सी जान ही पूरा करेगी..क्योंकि बेटियां हमेशा भाग्यशाली कही जाती हैं। आप भी इस बेटी को अपना आशीर्वाद दें। जुग-जुग जियो।