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भीड़ से दूर, स्वर्ग के सबसे पास – केदार हिमालय के Hidden Treks
बुग्याल, हिमालयी वन और बर्फीली चोटियों का अद्भुत नज़ारा। आध्यात्म, रोमांच और एकांत का अनोखा संगम।
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: अगर आप पहाड़ के कुछ ऐसे गीतों पर थिरकना चाहते हैं, जिनमें पारंपरिक लोक गीत का तड़का लगा है, तो ये गीत आपके लिए है। कुमाऊं की पारंपरिक छपेली एक ऐसी विधा है जिसे वास्तव में सहेजे जाने की ज़रूरत है। अच्छी बात ये है कि उत्तराखंड के कुछ युवा इस पारंपरिक विधा में नई जान फूंक रहे हैं। इससे भी बेहतर बात ये है कि गढ़वाल में रहकर भी पांडवाज़ सिर्फ गढ़वाली नहीं बल्कि कुमाऊंनी गीतों को भी एक बेहतर अंदाज दे रहे हैं।
छपेली क्या है?
किसी की खूबसूरती को शब्दों के ताने-बाने में बुनकर झूमना, नाचना और गाना है छपेली। इसे कुमाऊं का सबसे चहेता नृत्य गीत कहा जाता है। पुरुष हुड़का-वादक होता है और वो गीत गाते हुए डांस करता है। इसके अलावा महिला नर्तकी गीतों के शब्दों के भावों के मुताबिक झूमकर नाचती है। इस गीत और नृत्य में यौवन के उल्लास की झलक मिलती है।