उत्तराखंड के लिए अच्छी खबर, 6 राज्यों ने एकजुट होकर शुरू की रेणुका परियोजना

उत्तराखंड के लिए एक अच्छी खबर है। 4596.76 करोड़ रुपये की रेणुका परियोजना पर 6 राज्यों के सीएम ने हस्ताक्षर किए हैं।
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उत्तराखंड: Sign and mou on renuka project
Image: Sign and mou on renuka project

: उत्तराखंड के लिए एक और अच्छी खबर है। एक परियोजना जिससे उत्तराखंड को भी फायदा होगा। पानी की समस्या से छुटकारा मिलेगा। इस परियोजना का नाम है रेणुका परियोजनाइस योजना से हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली को फायदा मिलेगा। खास तौर पर उत्तराखण्ड को सिंचाई, घरेलू और औद्योगिक उपयोग के लिए 19.72 एमसीएम पानी मिलेगा। इस योजना का 90 फीसदी अनुदान भारत सरकार द्वारा दिया जाएगा। सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के बीच रेणुका बहुउद्देशीय परियोजना के निर्माण के लिए एमओयू पर साइन किए गए। इस मौके पर उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर मौजूद थे। आपको बता दे कि इससे पूर्व लखवाड़ परियोजना पर भी एमओयू किया गया था। अब इस परियोजना की कुछ खास बातें जानिए।

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रेणुका परियोजना हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के गिरी नदी में स्थित बहुउद्देशीय परियोजना है। इस परियोजना में 148 मीटर ऊँचा राॅक फिल बांध प्रस्तावित है। परियोजना की कुल लागत 4596.76 करोड़ रुपये है। इस परियोजना के जलाशय में 514.32 एम.सी.एम जल का संग्रहण किया जा सकेगा। इस परियोजना को साल 2008 में राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया गया है। इसका 90 प्रतिशत अनुदान भारत सरकार द्वारा दिया जायेगा। रेणुका परियोजना के निर्माण के बाद हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली को समझौते में निर्धारित मात्रा के मुताबिक पानी मिलेगा। जिसमें से उत्तराखण्ड राज्य को 19.72 एम.सी.एम (कुल जल का 3.81 प्रतिशत) जल सिंचाई, घरेलू व औद्योगिक उपयोग के लिए मिलेगा। 1994 में परियोजना से प्राप्त होने वाले जल के बंटवारे हेतु हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश एवं दिल्ली के बीच अनुबन्ध पर हस्ताक्षर किए गए थे। इसके बाद से यमुना नदी में प्रस्तावित विभिन्न परियोजनाओं की कार्यवाही कई सालों से लम्बित थी। कुल मिलाकर कहें तो उत्तराखंड के लिहाज से भी ये एक अच्छी खबर है।