उत्तराखंड के एक गांव में पीरियड्स पर महिलाओं को घर से बाहर रहने पर मजबूर किया जाता है। यही नहीं इसके लिए बकायदा एक रजस्वला केंद्र बना है।
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कोमल नेगी
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Image: Truth of Ghurchum village in uttarakhand
चम्पावत: देवभूमि उत्तराखंड में मां भगवती की पूजा की जाती है....मां नंदा को बेटी मान कर उसे हर 12 साल में ससुराल के लिए विदा किया जाता है...ऐसी धरती पर महिलाओं के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाला मामला सामने आया है। चंपावत के एक गांव में महिलाएं मासिक धर्म के वक्त आज भी छूआछूत का शिकार हो रही हैं। महिलाओं को मासिक धर्म के वक्त एक अलग भवन में रखा जाता है। जिसे यहां रजस्वला केंद्र कहते हैं। इससे भी ज्यादा शर्मनाक बात ये है कि इस भवन का निर्माण सरकारी फंड से हुआ है। सरकार जहां महिला सशक्तिकरण के लिए योजनाएं चला रही है, बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाव का नारा दिया जा रहा है, वहां महिलाओं के सम्मान पर चोट करने वाले रजस्वला केंद्र के लिए किस योजना के तहत फंड दिया गया इसकी जांच होनी चाहिए।
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इस गांव का नाम घुरचुम है, जो कि चंपावत के दुर्गम इलाके में बसा है। यहां बने रजस्वला केंद्र के बारे में कभी खुलासा ना हो पाता, अगर यहां के लोग भवन की मरम्मत के लिए जिलाधिकारी रणवीर सिंह चौहान के पास ना पहुंचते। जब गांव के लोगों ने जिलाधिकारी से रजस्वला केंद्र की मरम्मत के लिए कहा तो वो भी हैरान रह गए। बात खुली तो पता चला कि शर्मसार करने वाली परंपरा के चलते यहां की महिलाओं को पीरियड्स के वक्त घर से बाहर रहना पड़ता है। उन्हें अछूत माना जाता है। महिलाओं के रहने के लिए यहां बकायदा रजस्वला केंद्र बना है। इससे भी ज्यादा शर्मनाक ये है कि इसे भवन को सरकारी फंड से बनाया गया, लेकिन इसे किस योजना के तहत बनाया गया, ये बड़ा सवाल है। महिला-बाल विकास मंत्री रेखा आर्य ने भी इस घटना पर दुख जाहिर किया है। उन्होंने इस केंद्र को प्रतिबंधित करने के आदेश दिए हैं। साथ ही ये केंद्र किस फंड के तहत बना था, इसकी भी जांच कराई जा रही है।