देवभूमि की बेटी: कभी कपड़े सिलकर 5 रुपये कमाती थी, अब मिला पद्मभूषण सम्मान

उत्तराखंड की बेटी बछेंद्री पाल को पद्मभूषण सम्मान मिला है। माउंट एवरेस्ट फतह करने वाली पहली भारतीय महिला बछेंद्री पाल आज भी महिलाओं को सशक्त बनाने में जुटी हैं।
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उत्तराखंड: Story of padma bhushan bachendri pal
Image: Story of padma bhushan bachendri pal

उत्तरकाशी: पहाड़ की बेटी बछेंद्री पाल को सरकार ने पद्मभूषण सम्मान से नवाजा है। बछेंद्री पाल माउंट एवरेस्ट फतह करने वाली भारत की पहली और दुनिया की पांचवी महिला हैं। आम पहाड़ी लड़की से माउंट एवरेस्ट विजेता बनने तक का सफर बछेंद्री के लिए बेहद मुश्किल भरा रहा। बछेंद्री पाल का जन्म साल 1954 में उत्तरकाशी के नकुरी गांव में हुआ था। बचपन से ही उन्होंने जीवन में बहुत संघर्ष देखा, लेकिन कभी हार नहीं मानी। किसान परिवार में पैदा होने वाली बछेंद्री पाल ने बीएड तक की पढ़ाई की, लेकिन होनहार होने के बावजूद भी जब उन्हें कोई अच्छी नौकरी नहीं मिली तो उन्होंने लोगों के कपड़े सिलने शुरू कर दिए। एक रिपोर्ट के मुताबिक पूरे दिन कपड़े सिलने के एवज में उन्हें 5 से 6 रुपये मिलते थे, जिससे पूरे परिवार का खर्च चलता था। बड़ी डिग्री होने के बावजूद जब बछेंद्री को अच्छा रोजगार नहीं मिला तो उन्होंने नेहरू पर्वतारोहण संस्थान में दाखिला ले लिया। आगे जानिए सफलता की कहानी

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नेहरू पर्वतारोहण संस्थान में दाखिले के साथ ही बछेंद्री का पर्वतों को फतह करने का सिलसिला शुरू हो गया। 23 मई, 1984 के दिन बछेंद्री ने माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराने के साथ ही देश और प्रदेश को गर्व करने का मौका दिया। बछेंद्री पाल पढ़ाई में होशियार होने के साथ ही खेल-कूद में भी हमेशा आगे रहती थीं। उन्हें पद्मश्री, अर्जुन अवार्ड, नेशनल एडवेंचर अवार्ड समेत कई पुरस्कार मिल चुके हैं। आज भी बछेंद्री पाल महिला सशक्तिकरण अभियानों से जुड़ी हुई हैं। महिला सशक्तीकरण के उद्देश्य से वे साढ़े चार हजार बालिकाओं को लीडरशीप ट्रेनिंग दे चुकी हैं। धन्य हैं ऐसी महिलाएं जिन्होंने अपने अटूट संघर्ष से कामयाबी की नई कहानी लिखी है। राज्य समीक्षा की टीम की तरफ से बछेंद्री पाल को इस सम्मान के लिए हार्दिक शुभकामनाएं। देवभूमि उत्तराखंड को आप पर नाज़ है।