मुनस्यारी का खलियाटॉप आज पर्यटन के क्षेत्र मे अपनी अलग पहचान बना चुका है, इसका श्रेय यहां के युवा स
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कोमल
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Image: story of surendra panwar of munsyari
: सीमांत क्षेत्र मुनस्यारी को प्रकृति का वरदान मिला है, यहां की खूबसूरत वादियां पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन रही हैं...इस क्षेत्र को पर्यटन मानचित्र पर लाने का काम यहां के एक युवा होनहार ने किया है। इस युवा का नाम है सुरेंद्र पंवार, जो कि मुनस्यारी के खलियाटॉप में पर्यटक आवास गृह का संचालन करते हैं। एक वक्त था जब इस सीमांत इलाके की अपनी कोई पहचान नहीं थी, सुरेंद्र ने इस क्षेत्र को उसकी पहचान दिलाने का फैसला लिया और उन्हें अपने काम में सफलता भी मिली। सुरेंद्र ने खलियाटॉप में स्नो स्कीइंग और बर्ड वॉचिंग की संभावनाओं को तलाशा और इस पर काम करना शुरू कर दिया। जल्द ही मुनस्यारी में पर्यटन विकास का मॉडल तैयार हो गया, जिससे इस क्षेत्र को ना केवल पहचान मिली, बल्कि यहां के युवाओं को रोजगार भी मिला। खलियाटॉप आज विश्व पटल पर अपनी पहचान बना चुका है। आइए इनकी सफलता की कहानी जानिए।
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सुरेंद्र इस क्षेत्र में टूरिज्म एक्टिविटिज बढ़ाने की कोशिश में जुटे हैं। मदकोट में रहने वाले सुरेंद्र ने सोशल वर्क में एमए करने के बाद साल 2003 से 2008 तक दिल्ली की कई ट्रैवल कंपनियों में काम किया। यहां उन्होंने फॉरेन टूर मार्केटिंग के गुर सीखे। स्विटजरलैंड में स्कीइंग सीखने के बाद उन्होंने जर्मनी, फ्रांस, डेनमार्क और बेल्जियम जैसे देशों में जाकर विदेशी भाषाएं सीखीं इसके साथ ही पर्यटन से जुड़े हुए कोर्स भी किए। स्वदेश लौटकर उन्होंने Cosmos Trek कंपनी बनाई, ये कंपनी होम स्टे, ट्रैकिंग और कल्चरल टूर जैसे प्रोग्राम आर्गनाईज करती है। जल्द ही सुरेंद्र ने पर्यटक आवास गृह का संचालन करना शुरू कर दिया। उन्होंने यहां पर पर्यटकों को बर्ड् वॉचिंग के लिए बुलाया, साथ ही युवाओं को स्कीइंग भी कराई। मोनाल पक्षी के संरक्षण के लिए उन्होंने मोनाल संस्था का गठन किया। सुरेंद्र मुनस्यारी में बर्ड्स की 340 प्रजातियां खोजकर उन्हें अपने कैमरे में कैद कर चुके हैं। सुरेंद्र की मेहनत और ईमादार कोशिश का ही नतीजा है कि आज ये क्षेत्र बर्ड वाचिंग, स्कीइंग, ट्रेकिंग, कल्चरल टूरिज़्म के लिए अपनी अलग पहचान बना चुका है।