देवभूमि के गरीब घर का बेटा..नंगे पैरों से करता था प्रैक्टिस, मेडल जीतकर मोदी का भी दिल जीता

एथलीट सूरज पंवार ने उत्तराखंड के लिए कई उपलब्धियां हासिल कीं हैं, जानिए उनके संघर्ष और सफलता की कहानी...
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Peaceful and untouched trekking routes away from the crowds. Hidden trails where nature still remains raw and pure.

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उत्तराखंड न्यूज: STORY OF SURAJ PANWAR UTTARAKHAND
Image: STORY OF SURAJ PANWAR UTTARAKHAND

: चुनौतियों को पार कर जीत कैसे हासिल करनी है, ये कोई देहरादून के सूरज पंवार से सीखे। सूरज एथलीट हैं, उन्होंने यूथ ओलंपिक में रजत पदक जीत कर इतिहास रच दिया। आज सूरज विश्वस्तरीय एथलीट के तौर पर जाने जाते हैं, लेकिन दून के एक छोटे से गांव से निकल कर विश्वस्तर पर अपनी पहचान बनाना उनके लिए आसान नहीं था। एथलीट सूरज प्रेमनगर के कारबारी गांव के रहने वाले हैं। पिछले साल अक्टूबर 2018 में सूरज ने यूथ ओलंपिक में रजत पदक जीता था। वो यूथ ओलंपिक में ट्रैक एंड फील्ड इवेंट में पदक जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट हैं। सूरज बचपन से ही एथलीट बनना चाहते थे, उन्होंने रेस की प्रैक्टिस शुरू की और धीरे-धीरे ये उनका जुनून बन गया। कई बार उनके पास पहनने को जूते नहीं होते थे, तो चाय बागान में नंगे पैर दौड़े। फटे-पुराने जूतों से भी काम चलाया, पर दौड़ना नहीं छोड़ा। इसी जुनून और रफ्तार की बदौलत वो दौड़ते-दौड़ते यूथ ओलंपिक तक का सफर कर आए। सूरज ने यूथ ओलंपिक में पहली बार हिस्सा लिया और पांच हजार मीटर वॉक रेस में रजत पदक जीता भी। वो अब तक कई प्रतियोगिताएं जीत चुके हैं।

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यूथ ओलंपिक एशिया एरिया क्वालीफिकेशन में उन्होंने रजत पदक जीता। नेशनल यूथ एथलेटिक्स चैंपियनशिप, छठी नेशनल रेस वाकिंग चैंपियनशिप और नेशनल जूनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भी वो सिल्वर, गोल्ड और कांस्य पदक जीत चुके हैं। उनका अगला टारगेट है साल 2024 में होने वाले ओलंपिक गेम्स, सूरज इसमें हिस्सा लेना चाहते हैं और देश के लिए पदक जीतना चाहते हैं। सूरज की इसी मेहनत के मुरीद देश के पीएम मोदी भी हैं..देखिए


इसके अलावा वो साल 2022 में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स की भी तैयारी कर रहे हैं। सूरज आज सफलता की ऊंचाईयां चढ़ रहे हैं, लेकिन उन्होंने अपने सहज स्वभाव और शालीनता को खोने नहीं दिया। साधारण जीवन जीने वाले सूरज आज भी मोबाइल फोन से दूर रहते हैं। वो अपनी सफलता का श्रेय अपने गुरु कोच अनूप बिष्ट को देते हैं। सूरज कहते हैं कि साल 2013 में जब मनीष रावत ने ओलंपिक में हिस्सा लिया था, तब तक उन्हे वाक रेस इवेंट के बारे में पता नहीं था। बाद में उन्होंने जानकारी जुटाई और स्पोर्ट्स कॉलेज के कोच अनूप बिष्ट से ट्रेनिंग लेने लगे। साल 2018 में सूरज ने मनीष रावत के दिए जूते पहनकर ही यूथ ओलंपिक में हिस्सा लिया था और कमाल की बात ये है कि उन्होंने इस प्रतियोगिता में रजत पदक जीतकर देश और प्रदेश को गौरवान्वित किया। सूरज लगातार मेहनत कर रहे हैं। राज्य समीक्षा टीम की तरफ से उन्हें सुनहरे भविष्य के लिए ढेरों शुभकामनाएं।