केदार आपदा में देवदूत बने थे कैप्टन रंजीव लाल, उत्तरकाशी में हेली क्रैश के बाद दुनिया से चले गए

उत्तरकाशी में हेलीकॉप्टर क्रैश हादसे में मारे गए कैप्टन रंजीव लाल को आपदाग्रस्त इलाकों में काम करने का लंबा अनुभव था...
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Helicopter Crash: Helicopter Crash Uttarkashi captain ranjeev lal
Image: Helicopter Crash Uttarkashi captain ranjeev lal

: बारिश ने उत्तराखंड में तबाही मचाई है। उत्तरकाशी में लोग रविवार को आई आपदा का मातम मना ही रहे थे, कि तभी एक और मनहूस खबर आ गई। आराकोट में राहत कार्य में लगा हैलीकॉप्टर क्रैश हो गया। हादसे में पायलट समेत तीन लोग मारे गए। जिस तरह की मुसीबत इस वक्त उत्तराखंड झेल रहा है, उसे देखकर तो यही लगता है कि ईश्वर भी शायद देवभूमि की परीक्षा ले रहे हैं। हेलीकॉप्टर क्रैश में 53 साल के कैप्टन रंजीव लाल का निधन हो गया। बात करें देवभूमि उत्तराखंड की तो यहां प्राकृतिक आपदा का लंबा इतिहास रहा है, और कैप्टन रंजीव लाल आपदाग्रस्त इलाकों के लिए देवदूत से कम नहीं थे। साल 2013 में आई केदारनाथ आपदा को भला कौन भूल सकता है। जिस वक्त हर तरफ बस सैलाब ही सैलाब नजर आ रहा था, उस वक्त कैप्टन लाल पूरी ईमानदारी से अपना फर्ज निभाते रहे। उन्होंने केदारनाथ आपदा के वक्त ना सिर्फ राहत और बचाव कार्य बल्कि पुनर्निर्माण कार्यों में भी अपना सहयोग दिया। केदारनाथ की विषम परिस्थितियों में भी वो हेलीकॉप्टर उड़ाते और जरूरतमंदों तक राहत सामग्री पहुंचाते थे। कैप्टन रंजीव लाल भारतीय वायुसेना का हिस्सा रहे और अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई बहादुरी भरे कारनामे किए। उन्हें आपदाग्रस्त इलाकों में काम करने का लंबा अनुभव था।

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बुधवार को भी वो इसी सेवाभाव से अपना काम कर रहे थे, पर एक अनहोनी ने उन्हें देवभूमि से हमेशा के लिए छीन लिया। आराकोट में सेब के ढुलान के लिए लगी ट्रॉली के तारों में उलझ कर उनका हेलीकॉप्टर क्रैश हो गया, जिसमें कैप्टन रंजीव लाल की मौत हो गई। आपदाग्रस्त उत्तराखंड के लिए उनका यूं चले जाना किसी दोहरे झटके से कम नहीं है। आपको बता दें कि रविवार को उत्तरकाशी के आराकोट इलाके में बादल फटने के बाद जमकर तबाही हुई है। संपर्क मार्ग, पुल, सड़कें सैलाब की भेंट चढ़ गईं। सड़कें नहीं बचीं तो सरकार ने हेलीकॉप्टरों के जरिए प्रभावितों तक राहत सामग्री पहुंचाने की ठानी। इसके लिए आराकोट और मोरी में बेस बनाया गया। बुधवार को हैरिटेज कंपनी का हेलीकॉप्टर मोरी बेस से उड़ान भर कर मोल्डी गांव में राहत सामग्री पहुंचाने गया था। इसी दौरान हेलीकॉप्टर क्रैश हो गया। हेलीकॉप्टर का मलबा जंगल में गिरा। हादसे में हेलीकॉप्टर के पायलट कैप्टन रंजीव लाल की मौत हो गई। वो दिल्ली के सुखदेव विहार में रहते थे। कैप्टन लाल के साथ ही 37 साल के इंजीनियर शैलेष कुमार सिंह और यमुनोत्री के रहने वाले राजपाल राणा की भी मौत हो गई। रेस्क्यू टीमें तीनों के शव लेकर आराकोट पहुंच गई हैं।