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ऋषियों का मार्ग: केदार हिमालय के इन ट्रेक्स पर शोर नहीं, सिर्फ मंत्र सुनाई देते हैं
प्रकृति से जुड़ने और आत्मिक शांति पाने का अवसर। केदार हिमालय की वो यात्राएं जो ज़िंदगी भर याद रहती हैं।
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: उत्तराखंड को यू हीं वीरभूमि नहीं कहा जाता। हर बार इस धरती के लालों ने साबित किया है कि वो जितने सजग अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए रहते हैं, उतने ही तत्पर वो अपनी मां की रक्षा के लिए भी रहते हैं। इन्हीं जांबाज नौजवानों में से एक कहानी पंकज सेमवाल की भी है। टिहरी के ग्राम नारगढ़ (धारमंडल) के रहने वाले पंकज ने वीरता की मिसाल कायम की थी। इस वजह से देश के राष्ट्रपति से लेकर, प्रधानमंत्री और आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत ने इस नौजवान की बहादुरी को सलाम किया था। महज 15 साल की उम्र में पंकज सेमवाल गुलदार के जबड़े से अपनी मां की जान बचाई थी। ये बात साल 2016 की है..पंकज कि मां और भाई-बहन गाँव के पास एक जंगल में थे। उस वक्त एक गुलदार ने उन पर हमला कर दिया I थोड़ी ही दूर पर मौजूद पंकज ने अपनी माँ कि चिल्लाने कि आवाज़ सुनी I वो दौड़ कर उनके पास पंहुचाI उसने देखा की मां और भाई को गुलदार घायल कर चुका था। आगे पढ़िए