उत्तराखंड के गंगोरी में पुल के बनने-टूटने का सिलसिला अब थमने वाला है, बीआरओ यहां पर पोर्टेबल स्टील ब्रिज बनाएगा...
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कोमल नेगी
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Image: Bro will build portable steel bridge in gangori
उत्तरकाशी: पहाड़ में पुलों के बनने-टूटने का सिलसिला लगातार चलता रहता है। उत्तरकाशी में असी गंगा पर बना ब्रिज भी इससे अछूता नहीं है। ये पुल अब तक कई बार टूट चुका है, टूटने के बाद इसे फिर से बनाया गया, पर अब ऐसा बार-बार नहीं करना पड़ेगा। गंगोत्री हाईवे पर गंगोरी में बने बेली ब्रिज को हटाकर इसकी जगह पोर्टेबल स्टील ब्रिज लगाया जाएगा। पोर्टेबल स्टील ब्रिज लगाने की कार्रवाई शुरू हो गई है। जल्द ही यहां नया पुल दिखाई देगा। पुल निर्माण का काम डेढ़ से दो महीने तक चलेगा। तब तक वाहनों को असी गंगा पर बनाए गए वैकल्पिक रास्ते से निकाला जाएगा। गंगोत्री हाईवे पर बने मोटर पुल के बहने का सिलसिला साल 2012 में शुरू हुआ। उस वक्त गंगा में बाढ़ आई हुई थी, जिस वजह से मोटर पुल बह गया था। बाद में बीआरओ को नया ब्रिज बनाने की जिम्मेदारी दी गई। बीआरओ ने यहां नया पुल बनाया था, पर साल 2017 में ओवरलोड की वजह से ये भी ढह गया।
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पुल निर्माण की कमान दोबारा बीआरओ को दी गई। यहां पर नया बेली ब्रिज बनाया गया, पर बनने के चार महीने के भीतर ही इसने भी साथ छोड़ दिया। ओवर लोडिंग और और खराब गुणवत्ता की वजह से ये पुल टिक नहीं सका। गंगोरी पुल गंगोत्री धाम की यात्रा के साथ ही भारत-चीन सीमा की सुरक्षा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। पुल से भारी वाहन गुजरते हैं, पर इनका भार पुल सह नहीं पाते। फिलहाल यहां पर गंगोरी बेली ब्रिज है, जिसे हटाकर नया पोर्टेबल स्टील ब्रिज लगाया जाना है। इसकी भार सहने की क्षमता बेली पुल से ज्यादा होगी। गंगोरी में 190 फीट स्पान का 4.25 मीटर चौड़ा पोर्टेबल स्टील ब्रिज तैयार किया जाएगा, जिसकी भार सहने की क्षमता 70 टन होगी। पुराने पुल को हटाने का काम 17 नवंबर से शुरू हो गया है। करीब 60 से 70 दिन में पुल के निर्माण का काम पूरा हो जाएगा।