बारिश-बर्फबारी से जो जिला सबसे ज्यादा बेहाल है वो है उत्तरकाशी, जहां 350 से ज्यादा गांव बर्फ से ढके हैं...
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कोमल
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Trails once used by sages, locals, and shepherds. Ideal for travelers seeking silence over social media fame.
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Image: Snow heavy blanket covered uttarakhand’s 200 villages
देहरादून: उत्तराखंड के पहाड़ी जिले बर्फ की आगोश में लिपटे हैं। बर्फबारी से पर्यटकों के चेहरे खिले हुए हैं, पर यही बर्फबारी स्थानीय लोगों के लिए मुसीबत का सबब बन गई है। लोग धूप खिलने का इंतजार कर रहे हैं, पर ये इंतजार खत्म ही नहीं हो रहा। शुक्रवार को कुमाऊं और गढ़वाल के पर्वतीय इलाकों में खूब बर्फबारी हुई। उत्तरकाशी, चमोली और रुद्रप्रयाग के कई गांव बर्फ के आगोश में हैं। चमोली में बर्फबारी से बलाण, भैतरा, किमोली, लोहागंज, सुया और धारकोट जैसे 85 गांवों में बिजली-पानी की आपूर्ति ठप हो गई है, संचार सेवाएं भी काम नहीं कर रहीं। गांवों को जिला मुख्यालय से जोड़ने वाले पैदल रास्ते बर्फ से पटे हैं। जिले में बदरीनाथ हाईवे और मलारी हाईवे समेत 5 सड़कें बंद हैं। बदरीनाथ धाम में पानी पाइप लाइनों में जम गया है। बीकेटीसी के लोग बर्फ को पिघलाकर खाना बना रहे हैं।
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कर्णप्रयाग में भी तापमान काफी नीचे चला गया है, जिससे कड़ाके की ठंड पड़ रही है। यहां बीस से ज्यादा गांव बर्फ से ढके हैं। बारिश के चलते कई सड़कें बंद है। राहत रुद्रप्रयाग में भी नहीं है। यहां 50 से ज्यादा गांवों का मुख्यालय से संपर्क टूट गया है। केदारनाथ धाम में पिछले 24 घंटे से लगातार बर्फबारी हो रही है, जिस वजह से पुनर्निर्माण कार्य ठप पड़े हुए हैं। बारिश-बर्फबारी से जो जिला सबसे ज्यादा बेहाल है, वो है उत्तरकाशी, जहां 350 से ज्यादा गांव बर्फ से ढके हुए हैं। जिले में 50 से ज्यादा गांवों में जनवरी की शुरुआत से बिजली नहीं आ रही। विद्युत आपूर्ति अब तक बहाल नहीं हो पाई है। लोग विद्युत आपूर्ति बहाल होने का इंतजार कर रहे हैं। कुमाऊं में भी मौसम के चलते दुश्वारियां बढ़ी हैं। मुनस्यारी में बर्फबारी के चलते थल-मुनस्यारी रोड बंद है। वाहनों को जौलजीबी रोड से भेजा जा रहा है। बारिश-बर्फबारी से ठिठुरन बढ़ गई है, ठंड से राहत पाने की हर कोशिश नाकाम साबित हो रही है।