गढ़वाल के युवक की दिल्ली में बेरहमी से हत्या, दोनों हाथ काटे गए..मोतीनगर में मिली लाश

टिहरी जिले के (Vinod mamgain tehri garhwal) जुगड़ गांव का रहने वाला विनोद 29 फरवरी को रोज की तरह ड्यूटी पर गया था, लेकिन शाम तक घर नहीं लौटा। रविवार को उसकी क्षत-विक्षत लाश मोतीनगर में पड़ी मिली...
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Vinod mamgain tehri garhwal: Vinod mamgain tehri garhwal murdered brutally in delhi
Image: Vinod mamgain tehri garhwal murdered brutally in delhi

टिहरी गढ़वाल: पहाड़ एक बार फिर शोक में है, सदमे में है। यहां के एक नौजवान की दिल्ली में बेहरमी से हत्या कर दी गई। 34 साल के विनोद प्रसाद ममगांईं (Vinod mamgain tehri garhwal) चंबा के जुगड़ गांव के रहने वाले थे। किसी तरह हिम्मत जुटाकर वो दिल्ली पहुंचे थे, ताकि अपने परिवार का पेट पाल सकें। दिल्ली में वो किसी निजी कंपनी में जॉब कर रहे थे। उनका परिवार मयूर विहार फेज-3 में रहता है। 29 फरवरी को विनोद रोज की तरह ड्यूटी के लिए निकले थे, लेकिन शाम को घर नहीं पहुंचे। घरवालों को टेंशन होने लगी। परिजनों की पूरी रात बैचेनी से कटी। रविवार को परिजन और पुलिस एक बार फिर युवक की तलाश में जुट गए। परिजन डरे हुए थे, मन अनहोनी की आशंका से कांप रहा था, पर ये बुरा सपना सच बन गया। परिजनों की आशंका सच साबित हुई। रविवार को विनोद की लाश वेस्ट दिल्ली के मोतीनगर में पड़ी मिली। विनोद के शरीर पर चाकू से वार करने के कई निशान थे। पुलिस के अनुसार, करीब नौ बजे पीसीआर पर कॉल आई. एक शव छठ घाट बसई दारापुर के पास पड़ा हुआ है। विनोद प्रसाद ममगाईं को चाकू और किसी अन्य तेज धारदार हथियार से मारा गया है साथ ही दोनों हाथ भी काटे गए हैं, लेकिन हाथ शरीर से अलग नहीं हुए हैं।

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हत्यारों ने विनोद ममगाईं (Vinod mamgain tehri garhwal) को बेरहमी से मारा था। परिजनों का कहना है कि विनोद की हत्या दंगाईयों ने की है। हत्यारों ने बेहरमी की सारी हदें पार करते हुए उसके हाथ भी काट दिए थे। परिजनों ने दंगाइयों द्वारा युवक की हत्या की आशंका जताते हुए पुलिस को तहरीर दी, जिसमें उन्होंने हत्यारोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग भी की। आपको बता दें कि दिल्ली में हुए दंगों में पौड़ी के रहने वाले दिलबर सिंह की भी मौत हो गई थी। वो दिल्ली की एक बेकरी में काम करते थे। घटना के वक्त दिलबर बेकरी के गोदाम में सो रहे थे, तभी दंगाइयों ने गोदाम को आग लगा दी, जिसमें दिलबर सिंह की जान चली गई।