इस वक्त प्रदेश में सिर्फ 318 वेंटिलेटर हैं। जिस रफ्तार से कोरोना के केस बढ़ रहे हैं, उसे देखते हुए आने वाले वक्त में हमें और वेंटिलेटर की जरूरत पड़ने वाली है। वेंटिलेटर की कमी दूर करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जरूरी कदम उठाए हैं...
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कोमल नेगी
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Image: Uttarakhand will get 100 ventilator on 10 days
नैनीताल: राज्य सरकार कोरोना वायरस संक्रमण से निपटने के लिए हर जरूरी इंतजाम कर रही है। देहरादून में कोरोना संक्रमण दूसरे चरण में पहुंच गया है, इसलिए ये और भी जरूरी हो जाता है कि हम बचाव के साथ-साथ हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को भी मजबूत करें। एक और बड़ी चुनौती है और वो है प्रदेश में वेटिलेटरों की कमी। इस चुनौती से निपटने के लिए राज्य सरकार ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है। स्वास्थ्य विभाग ने वेंटिलेटर बनाने वाली कंपनी को 100 वेंटिलेटर का ऑर्डर दिया है। कंपनी ने सप्लाई करने के लिए 10 दिन का समय मांगा है। यानि स्वास्थ्य विभाग को दस दिन में सौ वेंटिलेटर मिल जाएंगे। यहां आपको उत्तराखंड में वेंटिलेटर की उपलब्धता के बारे में भी जानना चाहिए। इस वक्त पूरे प्रदेश में सिर्फ 318 वेंटिलेटर उपलब्ध हैं।
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जिस रफ्तार से उत्तराखंड में नए कोरोना पॉजिटिव केस सामने आ रहे हैं, उसे देखते हुए ये तय है कि भविष्य में और वेंटिलेटर की जरूरत पड़ने वाली है। यही वजह है कि स्वास्थ्य विभाग की तरफ से व्यवस्थाओं में और तेजी लाई जा रही है। मेडिकल उपकरणों की खरीद पर जोर है। सबसे ज्यादा जरूरत वेंटिलेटरों की है। संक्रमण फैलने से वेंटिलेटर कम पड़ सकते हैं। स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. अमिता उप्रेती ने कहा कि हमने सौ वेंटिलेटरों का ऑर्डर दे दिया है। 10 दिन के भीतर वेंटिलेटर उपलब्ध हो जाएंगे। कोरोना संक्रमण को कम्युनिटी लेवल पर फैलने से रोकने का पूरा प्रयास किया जा रहा है। बात जब वेंटिलेटर की हो रही है तो आपको आईआईटी रुड़की द्वारा तैयार किए गए खास वेंटिलेटर के बारे में भी बताते हैं। हाल ही में आईआईटी रुड़की ने कोरोना के लिए खास तरह पोर्टेबल वेंटिलेटर तैयार किया है। आगे जानिए इसकी खूबियां
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हाईटेक सुविधाओं से लैस इस वेंटिलेटर का नाम ‘प्राणवायु’ है। जिसे आईआईटी रुड़की की टीम ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश की मदद से तैयार किया है। इस वेंटिलेटर की अनुमानित लागत सिर्फ 25 हजार रुपये है। इसकी स्वचालित प्रक्रिया दबाव और प्रवाह की दर को सांस लेने और छोड़ने के अनुरूप नियंत्रित करती है। ये तो आपने जान ही लिया कि वेंटिलेटर पोर्टेबल है। इसका इस्तेमाल तब उपयोगी साबित हो सकता है, जब अस्पताल के किसी वार्ड या खुले क्षेत्र को आईसीयू में परिवर्तित करना जरूरी हो जाए। इसमें रियल टाइम स्पायरोमेट्री और अलार्म लगा है, जो इसे सुरक्षित और विश्वसनीय बनाता है। आईआईटी रुड़की की टिंकरिंग प्रयोगशाला के समन्वयक प्रो. अक्षय द्विवेदी ने बताया कि प्राणवायु को खासतौर पर कोविड-19 के लिए डिजाइन किया गया है। यह कम लागत वाला, सुरक्षित और विश्वसनीय मॉडल है। जिसका इस्तेमाल बच्चों, वयस्कों और बुजुर्गों के लिए किया जा सकता है। इस पर अनुसंधान का काम लॉकडाउन में शुरू हुआ था और एक हफ्ते के भीतर इसे विकसित भी कर लिया गया। कोरोना के खिलाफ लड़ाई में ये वेंटिलेटर अहम हथियार साबित हो सकता है।