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हजारों वर्षों से जलती अखंड ज्योति के सामने सात फेरे - आस्था, परंपरा और प्रकृति का अनोखा संगम
पहाड़, मंत्र और देवभूमि का आशीर्वाद.. त्रियुगीनारायण में शादी सिर्फ एक समारोह नहीं, आध्यात्मिक अनुभव है।
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चमोली: आज सुबह 4.30 बजे बदरीनाथ धाम के कपाट इस वर्ष मनुष्य पूजा के लिए खोल दिए गए। कपाट खोलने की प्रक्रिया ब्रह्म मुहूर्त में प्रातः 3 बजे से ही शुरू हो गई थीं। बदरीनाथ रावल ईश्वर प्रसाद नंबूदरी द्वारा विशेष पूजा-अर्चना की गई। इस दौरान गुरु शंकराचार्यजी की गद्दी, उद्धवजी, कुबेरजी की पूजा की गई। बदरी धाम के कपाट खुलने के बाद लक्ष्मी माता को मंदिर में स्थापित किया इसके बाद भगवान बदरीनाथ का तिल के तेल अभिषेक किया गया। हर साल हजारों भक्तों के सामने खोले जाने वाले कपाट इस साल लॉकडाउन की वजह से लगभग 11 लोगों ही उपस्थिति में ही खुले। सभी ने सोशल डिस्टेंसिंग नियमों का पालन किया।