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No reels. No crowds. Just Kedar Himalaya - This trek doesn’t want to be famous..
Alpine meadows, dense forests, and snow-capped peaks in one journey. Suitable for both beginner and experienced trekkers.
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हल्द्वानी: यह सीजन पहाड़ के रसीले फलों को खाने का सीजन है। इस मौसम ने आड़ू, पुलम और खुमानी की डिमांड उत्तराखंड के मैदानी और पहाड़ी इलाकों में खूब है। बता दें कि पहाड़ के रसीले और स्वादिष्ट फलों की बागवानी प्रदेश के ऊंचे और सबसे ठंडे इलाकों में होती है मगर जागरूक युवा इस मिथ को तोड़ते नजर आ रहे हैं। युवाओं के बीच लगातार फलों और सब्जियों की बागवानी का क्रेज बढ़ रहा है और वह अपने ही घरों के बगीचों में यह रसीले फल लगा रहे हैं। अब आप ही बताइए, क्या आपने कभी सोचा था कि पहाड़ी के रसीले फलों की बागवानी कभी मैदानी क्षेत्रों में संभव हो पाएगी? सभी का उत्तर लगभग नहीं में होगा, मगर ऐसा संभव है। हल्द्वानी के निवासी संजय पांडे ने यह कर दिखाया है। उन्होंने पहाड़ के ठंडे इलाकों में उगने वाले पुलम फल की बागवानी अपने घर में तैयार की है। उन्होंने कड़ी मेहनत से अपने ही घर के बगीचे में पुलम उगाया और नतीजा सबको अचंभित करने वाला सामने। उनके घर लगे पेड़ से लगभग 50 किलो से अधिक पुलम के फल तैयार हुए हैं। लोगों का मानना है कि पुलम की बागवानी अक्सर ठंडे इलाकों में की जाती है। हल्द्वानी के निवासी युवा संजय पांडे यह मिथ तोड़ते नजर आ रहे हैं। अब जलवायु परिवर्तन के चलते हल्द्वानी और उसके आसपास के क्षेत्रों में भी पुलम और अन्य पहाड़ी फलों की बागवानी की जा सकती है।