उत्तराखंड: कार्तिक स्वामी में डांस? हेमा नेगी करासी जी.. पहले मंदिर की आस्था और परंपरा तो जान लेतीं!

रुद्रप्रयाग स्थित कार्तिक स्वामी मंदिर में हेमा नेगी करासी ने अपना नया गीत फिल्माया है। मंदिर समिति ने आपत्ति जताई है, जबकि सोशल मीडिया पर मंदिरों में रील और शूटिंग को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
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Kartik Swami Temple: Kartik Swami Temple Video Hema Negi Karasi Song Faces Backlash
Image: Kartik Swami Temple Video Hema Negi Karasi Song Faces Backlash

रुद्रप्रयाग: लोक कलाकारों की जिम्मेदारी केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत के प्रति भी संवेदनशील रहना चाहिए। हाल के वर्षों में उत्तराखंड के कई प्रमुख मंदिरों में रील और वीडियो शूटिंग को लेकर विवाद सामने आए हैं। अब हेमा नेगी करासी के नए गीत ने इस मुद्दे पर नई बहस छेड़ दी है।

Dance in Kartik Swami Temple: Hema Negi Karasi's Song a mockery of Uttarakhand culture

उत्तराखंड के मंदिरों में रीलबाजी करने से रोकने के लिए नियम और कानून बनाए जा रहे हैं, जबकि उत्तराखंड के कुछ सांस्कृतिक कलाकार खुद मंदिरों की शांति, उत्तराखंड की संस्कृति और परंपराओं की धज्जियां उड़ा रहे हैं। हेमा नेगी करासी का एक गीत अभी कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर रिलीज हुआ है। इस गीत में कार्तिक स्वामी मंदिर में नाच-गाना किया जा रहा है।

कार्तिक स्वामी मंदिर की मान्यता

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग में क्रोंच पर्वत पर स्थित प्रसिद्ध कार्तिक स्वामी मंदिर, शिव-पार्वती के ज्येष्ठ पुत्र भगवान कार्तिकेय को समर्पित है। भगवान कार्तिकेय 'बाल ब्रह्मचारी' हैं, और कार्तिकेय यहां तप करने के लिए शांति की तलाश में आए थे।

शरीर त्याग और हड्डियों की पूजा

मान्यता है कि जब भगवान गणेश ने माता-पिता (शिव-पार्वती) की परिक्रमा कर पूरे ब्रह्मांड की परिक्रमा का फल पा लिया, तो कार्तिकेय जी क्रोधित हो गए। उन्होंने आजीवन ब्रह्मचारी रहने का और महिलाओं से दूर रहने का प्रण ले लिया था। अपना क्रोध शांत करने के लिए उन्होंने अपनी देह का त्याग कर दिया। कार्तिक स्वामी मंदिर में उनकी मूर्ति या चित्र नहीं, बल्कि उनकी उन्हीं अस्थियों (हड्डियों) की पूजा होती है।

आस्था, परंपरा... और सस्ती लोकप्रियता

एक और पौराणिक कथा के अनुसार, जब क्रोधित भगवान कार्तिकेय ध्यान में लीन थे, तब इंद्र देव ने उनका ध्यान भटकाने के लिए अप्सराएं भेजी थीं, इससे क्रोधित होकर कार्तिकेय जी ने श्राप दिया था कि जो भी महिला उनके स्थान पर आकर उनका ध्यान भंग करेगी या दर्शन करेगी, वह श्राप भोगेगी। लेकिन आस्था, परंपरा जैसी चीजों से हेमा नेगी करासी जैसे लोगों का क्या वास्ता ? महज कुछ सस्ते व्यूज और सस्ती लोकप्रियता के लिए ये तथाकथित सांस्कृतिक कलाकार किसी भी सीमा को पार करने को तैयार हैं।

रीलबाजी कैसे रोकें जब अपने ही कलाकार...

किसी और को क्या कहें... जब उत्तराखंड की लोक संस्कृति के ध्वजवाहक लोक कलाकार ही मंदिरों, संस्कृति, आस्था और परंपराओं की धज्जियां उड़ाने से बाज नहीं आ रहे। सरकार और मंदिर समितियां मंदिरों में रीलबाजी रोकने के लिए नए कानून, नए नियम बनाने को बाध्य हो रहे हैं। वहीं दूसरी ओर हेमा नेगी करासी जैसे तथा कथित लोक कलाकार संस्कृति की तो धज्जियां उड़ा ही रहे हैं इन्हें आस्था या उत्तराखंड की परंपराओं से कोई वास्ता नहीं है। ये स्वयं ऐसे उदाहरण पेश कर रहे हैं, जिन्हें देखकर इनके उत्तराखंडी लोककलाकार होने पर भी अब शर्म आने लगी है।

कार्तिक स्वामी मंदिर समिति ने भी जताई कड़ी आपत्ति

हेमा नेगी करासी के इस गीत के बाद कार्तिक स्वामी मंदिर समिति ने भी इस पर कड़ी आपत्ति जताई है। पश्वा पर देवता अवतरित हुए... लेकिन उसके बाद भी इन लोक कलाकारों को कुछ फर्क नहीं पड़ता, गीत सोशल मीडिया पर अभी भी मौजूद है। इन्हें बस सस्ते व्यूज और सस्ती लोकप्रियता से मतलब है।

आस्था का बना डाला मजाक

सोशल मीडिया पर उत्तराखंड के लोग भी संस्कृति का, अपने देवी देवताओं का और अपनी परंपराओं का मजाक उड़ता हुआ देख रहे हैं.. और इसे सराह रहे हैं (?)। क्या उत्तराखंड के ये लोक कलाकार उत्तराखंड की संस्कृति को भोजपुरी गीतों की परंपरा की ओर नहीं मोड़ रहे? लेकिन कोई पूछने वाला नहीं है, बल्कि इन कलाकारों को इन भद्दे गीतों पर अवार्ड दिए जा रहे हैं। उत्तराखंड और पहाड़ की संस्कृति सबसे पहले अपने देवी-देवताओं का सम्मान करना सिखाती है। कार्तिक स्वामी जैसे स्थान पर हेमा नेगी करासी का ये गीत उत्तराखंड की संस्कृति के साथ एक घिनौना मजाक है।