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भीड़ से दूर, स्वर्ग के सबसे पास – केदार हिमालय के Hidden Treks
बुग्याल, हिमालयी वन और बर्फीली चोटियों का अद्भुत नज़ारा। आध्यात्म, रोमांच और एकांत का अनोखा संगम।
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टिहरी गढ़वाल: उत्तराखंड की तकदीर अब भी वैसी ही है जैसे पहले थी। पलायन....इसी शब्द के आसपास घूम रही है उत्तराखंड के पहाड़ों की किस्मत। यह पहाड़ों की दुविधा है कि लोग इसको छोड़ कर शहरों की तरफ रुख कर रहे गई हैं। वैसे तो उत्तराखंड के पहाड़ों की वादियां सबको बहुत खूबसूरत लगती हैं मगर जरा नजदीक से देखें तो हमें गांव में पसरा सन्नाटा नजर आएगा। बंजर पड़े खेत नजर आएंगे। हमें गांव में रह रहे बुजुर्ग नजर आएंगे जो शहर जा चुके बच्चों का इंतजार कर रहे हैं। दुविधा ऐसी है कि पलायन के ऊपर कितना कुछ कहा जा चुका है, कितना कुछ लिखा जा चुका है। 22 वर्ष उत्तराखंड के मूल निवासी और पूर्व केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री डॉक्टर रमेश पोखरियाल ने पहाड़ों की दुविधा और पीड़ा को एक गीत के रूप में पन्नों में दर्ज किया था। गीत का नाम है " आवा गौं जौंला "। उन्होंने इस गीत के माध्यम से युवाओं को गांव में वापस लौटने का संदेश दिया। रमेश पोखरियाल के द्वारा लिखे गए इस गीत को हाल ही में जागर के प्रसिद्ध पद्मश्री प्रीतम भरतवाण है ने अपनी सुरीली आवाज दी है जो कि सोशल मीडिया पर खूब धूम मचा रहा है।