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चमोली: उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित कर दिया गया है। इसके आदेश आज सोमवार को जारी किए गए। बता दें कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने विश्व पर्यावरण दिवस पांच जून को ये एलान किया था। साल 2017 विधानसभा चुनावों से पहले जब बीजेपी ने अपना दृष्टि पत्र जारी किया था, तो उसमें भी गैरसैंण को राजधानी स्तर की अवस्थापनाओं और सुविधाओं से सुसज्जित कर गैरसैंण ग्रीष्मलीन राजधानी घोषित करने का भरोसा दिया था। उस वक्त दृष्टिपत्र में कहा गया था कि स्थायी राजधानी के लिए भी विभिन्न विकल्पों पर विधानसभा में विचार किया जाएगा। उस वक्त बीजेपी को बंपर 57 सीटें मिली थीं। उत्तराखंड के इतिहास में किसी भी राजनीतिक दल को अब तक इतनी सीटें नहीं मिली थीं। सीएम ने कुछ वक्त पहले ही गैरसैंण सदन में ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने का ऐलान किया था। आगे पढ़िए
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उत्तराखंड में विषम भौगोलिक परिस्थितियां है। इस वजह से राज्य आंदोलनकारियों ने एक अलग राज्य की मांग को लेकर बड़ा संघर्ष किया था। आपको याद होगा कि उत्तराखंड आंदोलन में कई आंदोलनकारियों को शहीद होना पड़ा था जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे। इस शक्ति के बूते नवंबर 2000 में उत्तराखंड उत्तर प्रदेश से अलग हुआ और एक अलग राज्य बना। आंदोलनकारी गैरसैण को राजधानी बनाने की मांग कर रहे थे लेकिन वहां संसाधन नहीं थे और इस वजह से देहरादून को अस्थाई राजधानी बनाया गया। अब बीजेपी ने अपना एक वादा पूरा किया है और एक तरह से बढ़त बनाई है। त्रिवेंद्र सरकार के इस फैसले के बाद से बीजेपी गदगद है। उधर कांग्रेस गैर सेंड के मुद्दे पर अब बैकफुट पर जाती दिख रही है।