Uttarakhand News: आयुष्मान योजना के नाम पर घोटाला, देहरादून के 5 अस्पतालों पर छापा.. 3 हॉस्पिटल सस्पेंड की कगार पर

उत्तराखंड में आयुष्मान योजना से जुड़े निजी अस्पतालों पर SHA की छापेमारी में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। मरीजों से अवैध वसूली, डॉक्टरों की गैरमौजूदगी और खराब स्वास्थ्य सेवाओं पर कई अस्पतालों को नोटिस जारी किया गया।
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Ayushman Yojana Hospital Inspection: Fraud under Ayushman scheme at a Dehradun hospitals
Image: Fraud under Ayushman scheme at a Dehradun hospitals

देहरादून: आयुष्मान भारत योजना से संबद्ध निजी अस्पतालों में राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण (SHA) की औचक छापेमारी में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। मरीजों से अवैध वसूली, बिना आवश्यकता मरीजों को आईसीयू में भर्ती करना, डॉक्टरों की गैरमौजूदगी, खराब डायलिसिस सेवाएं और सुरक्षा मानकों की अनदेखी जैसे मामलों का खुलासा होने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने सख्त रुख अपनाया है।

Fraud under Ayushman scheme at a Dehradun hospitals

राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के अध्यक्ष अरविंद सिंह ह्यांकी के निर्देश पर निदेशक क्लेम डॉ. सरोज नैथानी के नेतृत्व में गठित टीम ने पावरलाइफ अस्पताल, प्रेमसुख अस्पताल, प्रकाशदीप अस्पताल, वेलमेड अस्पताल और सुनंदा मेडिकल सेंटर का निरीक्षण किया। निरीक्षण में गंभीर खामियां पाए जाने के बाद पावरलाइफ अस्पताल, प्रकाशदीप अस्पताल और सुनंदा मेडिकल सेंटर की डायलिसिस यूनिट की आयुष्मान योजना से संबद्धता निलंबित करने की संस्तुति की गई है। इसके अलावा प्रेमसुख अस्पताल और सुनंदा मेडिकल सेंटर पर आर्थिक दंड लगाने की भी सिफारिश की गई है। सभी अस्पतालों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।

पावरलाइफ अस्पताल में अनावश्यक ICU भर्ती का मामला

जांच टीम को पावरलाइफ अस्पताल में कई गंभीर अनियमितताएं मिलीं। अस्पताल में सामान्य वार्ड उपलब्ध नहीं था और केवल एचडीयू तथा आईसीयू संचालित पाए गए। निरीक्षण के दौरान घबराहट और उल्टी की शिकायत वाले एक मरीज को आईसीयू में भर्ती रखा गया था, जिसे टीम ने अनावश्यक माना। अस्पताल में आयुष्मान योजना से संबंधित सूचना बोर्ड, टोल-फ्री नंबर और जागरूकता सामग्री भी प्रदर्शित नहीं थी। इसके अलावा आईसीयू चार्टिंग अपडेट नहीं थी और बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन से जुड़ी लॉग बुक पिछले तीन महीनों से अधूरी पाई गई।

प्रेमसुख अस्पताल में मरीजों से वसूले गए हजारों रुपये

प्रेमसुख अस्पताल में आयुष्मान योजना के लाभार्थियों से कथित तौर पर 48 हजार रुपये और अन्य मदों में 6 हजार रुपये लेने की शिकायत सामने आई। अस्पताल में रैंप की सुविधा नहीं थी और अग्नि सुरक्षा मानकों में भी कमी पाई गई। टीम ने यह भी पाया कि ऑपरेशन थिएटर की प्रभारी नर्स की जिम्मेदारी एक ओटी तकनीशियन निभा रहा था। अस्पताल स्टाफ को आयुष्मान योजना के तहत मरीजों की भर्ती और प्रक्रिया संबंधी जानकारी भी पर्याप्त रूप से नहीं थी।

प्रकाशदीप अस्पताल की स्थिति सबसे चिंताजनक

निरीक्षण के दौरान प्रकाशदीप अस्पताल में सबसे गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। मरीजों से 85 हजार रुपये तक वसूले जाने की शिकायत मिली। टीम के अनुसार अस्पताल का आईसीयू बेहद खराब स्थिति में था। दो गंभीर मरीजों को तत्काल दूसरे अस्पताल रेफर करना पड़ा। निरीक्षण के समय कोई भी उपचाररत चिकित्सक मौजूद नहीं मिला। मरीजों और उनके परिजनों ने बताया कि पिछले कई दिनों से नियमित डॉक्टर उपलब्ध नहीं हो रहे थे और इलाज मुख्य रूप से नर्सिंग स्टाफ के भरोसे चल रहा था।

सुनंदा मेडिकल सेंटर की डायलिसिस यूनिट पर सवाल

सुनंदा मेडिकल सेंटर में डायलिसिस यूनिट की स्थिति भी मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई। अस्पताल में पर्याप्त वेंटिलेशन, रैंप और आपातकालीन निकास मार्ग का अभाव था। डायलिसिस मरीजों के आवश्यक स्वास्थ्य रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं थे। साथ ही डायलिसिस में इस्तेमाल होने वाला आरओ सिस्टम भी निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतरा। मरीजों के तीमारदारों के लिए बैठने और आराम करने की पर्याप्त व्यवस्था भी नहीं मिली।

वेलमेड अस्पताल में भी मिलीं कई कमियां

वेलमेड अस्पताल में भी निरीक्षण के दौरान कई व्यवस्थागत कमियां सामने आईं। अस्पताल में रैंप और जागरूकता सामग्री उपलब्ध नहीं थी। 140 बेड की क्षमता वाले अस्पताल में 100 मरीज भर्ती होने के बावजूद आयुष्मान योजना के लाभार्थियों की संख्या बेहद कम पाई गई। बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन और ऑपरेशन थिएटर की गुणवत्ता जांच से संबंधित दस्तावेज भी संतोषजनक नहीं मिले।

स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता पर जोर

राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों को गुणवत्तापूर्ण और निशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना प्राथमिकता है। किसी भी अस्पताल द्वारा नियमों का उल्लंघन, मरीजों से अवैध वसूली या स्वास्थ्य मानकों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी अस्पतालों के जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।