बाड़ाहोती के जरिए चीनी सैनिक कई बार भारत में प्रवेश की कोशिश कर चुके हैं। कई बार तो भारतीय सैनिकों ने चीनी सैनिकों को खदेड़ा भी था। लद्दाख में सीमा पर जारी गतिरोध को देखते हुए यहां सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है...
-
komal
-
Advertisement
भीड़ से दूर, स्वर्ग के सबसे पास – केदार हिमालय के Hidden Treks
बुग्याल, हिमालयी वन और बर्फीली चोटियों का अद्भुत नज़ारा। आध्यात्म, रोमांच और एकांत का अनोखा संगम।
Example Ads Media
Image: India china border itbp
चमोली: लद्दाख की गलवान घाटी में चीन ने भारतीय सैनिकों के साथ जो किया, उसे लेकर पूरे देश में गुस्सा है। 15 जून की रात गलवान में हुई हिंसक झड़प में भारत ने अपने 20 जांबाजों को खो दिया। इस घटना के बाद चीन की सीमा से सटे इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की जा रही है। उत्तराखंड के चमोली जिले के जोशीमठ में भी जवानों के काफिले पहुंच रहे हैं। यहां भारतीय सेना ने भारत-चीन सीमा पर स्थित बाड़ाहोती, माणापास, घस्तोली स्थित चौकियों की सुरक्षा कड़ी कर दी है। सीमा क्षेत्र में भारतीय सेना के हेलीकॉप्टर लगातार रेकी कर रहे हैं। गलवान घाटी में चीन ने जो हिमाकत की उसे लेकर चमोली के लोगों में भी भारी रोष है, लोग चीन को सबक सिखाना चाहते हैं। वहीं चमोली की डीएम स्वाति एस भदौरिया ने बताया कि सीमांत गांव माणा और नीति में यहां रहने वाले लोगों के लिए तीन महीने की अतिरिक्त खाद्य सामग्री भेज दी गई है।
यह भी पढ़ें - उत्तराखंड में शोक की लहर, बॉर्डर पर शहीद हुआ पहाड़ का सपूत
उत्तराखंड में सीमा की सुरक्षा को लेकर भारतीय सेना के रिटायर्ड कर्नल और रक्षा विशेषज्ञ डीएस बर्तवाल ने कहा कि बाड़ाहोती सहित अन्य सीमाओं पर भारतीय सेना काफी अच्छी स्थिति में है। साल 1962 के बाद से अब बॉर्डर तक सड़कें पहुंच चुकी हैं। बाड़होती बॉर्डर में फिलहाल तनाव जैसी स्थिति नहीं है, सब कंट्रोल में है। आपको बता दें कि उत्तराखंड में चीन सीमा से लगे क्षेत्रों में फिलहाल सबकुछ ठीक-ठाक है, लेकिन यहां बाड़ाहोती इलाके में चीनी सैनिक पहले कई बार घुसपैठ की कोशिश कर चुके हैं। साल 2014 से लेकर साल 2018 तक करीब 7 बार चीनी सैनिकों ने यहां घुसपैठ की कोशिश की, लेकिन भारतीय सेना ने ड्रैगन के मंसूबों को कभी कामयाब नहीं होने दिया।