अनलॉक के 1 महीने बाद भी श्रीनगर रोडवेज को पर्याप्त सवारियां नहीं मिल पा रही हैं जिससे उनको भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। यहां तक कि रोडवेज बसों के लिए डीजल का खर्चा तक नहीं निकल पा रहा है। पढ़िए पूरी खबर-
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अनुष्का ढौंडियाल
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Image: Bad condition of Uttarakhand Roadways buses
देहरादून: कोरोना अपने साथ कई मुसीबतें साथ मे लाया है। कोरोना के भय के कारण कई चीजों के ऊपर सीधा-सीधा नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। अर्थव्यवस्था हिली हुई है, राज्य सरकार को रेवेन्यू भी नहीं मिल रहा है। इसी के साथ परिवहन के ऊपर भी कोरोना के कारण लगे लॉकडाउन की वजह से काफी बुरा प्रभाव देखने को मिला है। भले ही लॉकडाउन अब हट चुका हो और सरकार द्वारा लोगों की आवाजाही से भी प्रतिबंध हटा दिया गया हो उसके बाद भी लोगों के भीतर से कोरोना का भय नहीं निकल पा रहा है। यही कारण है कि वर्तमान में रोडवेज बसों के चालकों की हालत बेहद बुरी है। बसें तो चल रही हैं मगर सवारियां नामात्र की हैं। श्रीनगर रोडवेज बसों की भी हालत बेहद खस्ता है। चालकों की सवारियां बढ़ने का नाम ही नहीं ले रही हैं। आगे पढ़िए
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यह हाल तो तब है जब लॉकडाउन को खुले हुए 1 महीना हो गया है। 1 महीने से श्रीनगर परिवहन निगम के डिपो से अलग-अलग जनपदों के लिए बस सेवाएं शुरू कर दी गई हैं। अनलॉक के 1 महीने बाद भी लोगों के दिलों के अंदर कोरोना का खौफ साफ दिखाई दे रहा है। इसी का नतीजा है कि श्रीनगर रोडवेज को पर्याप्त सवारियां नहीं मिल पा रही हैं जिससे उनको भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। बसें चल रही हैं मगर सवारियां नहीं मिल पा रही हैं। इस वजह से बस चालक भी थोड़े टेंशन में आ रखे हैं। बता दें कि परिवहन निगम के श्रीनगर डिपो से देहरादून, हरिद्वार, कोटद्वार, जोशीमठ और गोपेश्वर के लिए रोडवेज बस सेवाएं 1 महीने से शुरू हो रखी हैं।
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श्रीनगर से देहरादून जाने के लिए सुबह 6 से 8 बजे डिपो पहुंचना होगा। परिवहन निगम ने श्रीनगर से देहरादून ओ लिए 430 रुपए किराया सुनिश्चित किया है। वहीं हरिद्वार के लिए किराया 410 रखा गया है और हरिद्वार जाने के लिए सुबह 7 बजे रोडवेज बस डिपो पहुंचना होगा। कोटद्वार के लिए भी सुबह 7 बजे बस चलेगी और किराया 415 रुपए रखा गया है। 11 बजे गोपेश्वर के लिए और 12 बजे जोशीमठ के लिए बस चलेंगी। मगर सवारियां पर्याप्त नहीं हैं। हालत तो यह है कि रोडवेज बसों के लिए डीजल का खर्चा तक नहीं निकल पा रहा है। डीजल का दाम इस समय आसमान छू रहा है। ऐसे में श्रीनगर परिवहन को काफी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। डिपो के अकाउंटेंट अशोक काला ने बताया कि बस सेवाएं तो प्रतिदिन चल रही हैं मगर फिलहाल सवारियां की कमी है। भविष्य में धीरे-धीरे सवारियां बढ़ने की संभावनाएं हैं।