हरिद्वार अर्धकुंभ-2027 को लेकर श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा ने धार्मिक कार्यक्रमों का विस्तृत कैलेंडर जारी कर दिया है। पहली बार अर्धकुंभ में 'अमृत स्नान' होगा। जानिए नगर प्रवेश, पेशवाई और तीनों अमृत स्नान की पूरी तारीखें।
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राज्य समीक्षा डेस्क
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Image: Haridwar Ardh Kumbh 2027 Schedule Announced
हरिद्वार: गुरुपूर्णिमा के पावन अवसर पर श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय सचिव एवं अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महासचिव श्रीमहंत हरि गिरि महाराज ने हरिद्वार अर्धकुंभ-2027 के धार्मिक आयोजनों का विस्तृत कार्यक्रम घोषित कर दिया। उन्होंने कहा कि हरिद्वार में आयोजित होने वाला अर्धकुंभ कुंभ मेले की तरह ही दिव्य, भव्य और आध्यात्मिक गरिमा के साथ संपन्न होगा। खास बात यह है कि अर्धकुंभ-2027 में पहली बार 'अमृत स्नान' का आयोजन किया जाएगा।
Haridwar Ardh Kumbh 2027 Schedule Announced
हरिद्वार स्थित माया देवी मंदिर में आयोजित पत्रकार वार्ता में श्रीमहंत हरि गिरि महाराज ने बताया कि जूना अखाड़ा ने अर्धकुंभ-2027 की तैयारियां शुरू कर दी हैं। उन्होंने कहा कि अर्धकुंभ केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, साधु-संत परंपरा और भारतीय आध्यात्मिक विरासत का विराट उत्सव है।
अर्धकुंभ-2027 का पूरा धार्मिक कार्यक्रम
21 नवंबर 2026 – हरिप्रबोधिनी एकादशी एवं गोधूलि लग्न में तपस्वियों का नगर प्रवेश।
1 दिसंबर 2026 – भैरव अष्टमी और अभिजीत मुहूर्त में छावनी का भूमि पूजन।
23 दिसंबर 2026 – श्री दत्तात्रेय जयंती के अवसर पर धर्मध्वजा स्थापना तथा संन्यासी एवं नागा संन्यासियों की छावनी में रोट पूजन।
14 जनवरी 2027 – उत्तरायणी स्नान एवं सूर्योपासना के साथ भव्य पेशवाई।
6 मार्च 2027 – त्रयोदशी एवं घनिष्ठा नक्षत्र में प्रथम अमृत स्नान।
8 मार्च 2027 – सोमवती अमावस्या के अवसर पर दूसरा अमृत स्नान।
14 अप्रैल 2027 – चैत्र शुक्ल पक्ष अष्टमी पर तीसरा और अंतिम अमृत स्नान।
करोड़ों श्रद्धालुओं के स्वागत की तैयारी
श्रीमहंत हरि गिरि महाराज ने कहा कि देश-विदेश से आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए संत समाज पूरी तरह तैयार है। उन्होंने विश्वास जताया कि हरिद्वार अर्धकुंभ-2027 आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टि से ऐतिहासिक आयोजन साबित होगा।
सरकार भी तैयारियों में जुटी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि अर्धकुंभ-2027 को दिव्य, भव्य और ऐतिहासिक स्वरूप में आयोजित किया जाएगा। राज्य सरकार लगातार तैयारियों की समीक्षा कर रही है। सरकार की ओर से सड़क, घाट, पेयजल, बिजली, सुरक्षा, यातायात, पार्किंग और श्रद्धालुओं की सुविधाओं से जुड़ी आधारभूत परियोजनाओं को तेजी से पूरा किया जा रहा है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। अर्धकुंभ-2027 को उत्तराखंड के धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत के लिए भी एक महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है।