उत्तराखंड: बदरीनाथ धाम को मिलेगा भव्य रूप, 424 करोड़ का मास्टर प्लान तैयार

विश्वप्रसिद्ध बदरीनाथ धाम के कायाकल्प के लिए 424 करोड़ का मास्टर प्लान तैयार किया गया है। आगे जानिए मास्टर प्लान के तहत धाम में क्या-क्या कार्य कराए जाएंगे।
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Badrinath dham: Badrinath new work to start soon
Image: Badrinath new work to start soon

चमोली: उत्तराखंड में केदारनाथ धाम की तर्ज पर बदरीनाथ धाम का भी कायाकल्प किया जाएगा। यहां सुविधाओं के विस्तार के लिए 424 करोड़ रुपये का मास्टर प्लान तैयार किया गया है। स्वीकृत धनराशि से बदरीनाथ धाम के पास स्थित तीर्थस्थलों को विकसित किया जाएगा। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए कई सेवाओं का विस्तार किया जाएगा। आवागमन और पार्किंग संबंधी सुविधाएं बेहतर होंगी। इसे लेकर चमोली की डीएम स्वाति एस भदौरिया ने संबंधित अधिकारियों की बैठक ली। बैठक में मास्टर प्लान को अंतिम रूप देने पर चर्चा हुई। अधिकारियों संग हुई बैठक के बाद डीएम स्वाति एस भदौरिया ने बताया कि मास्टर प्लान के तहत बदरीनाथ धाम में तीन चरणों में विकास कार्य होने हैं।

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424 करोड़ रुपये के मास्टर प्लान से बदरीनाथ धाम में सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। बदरीनाथ धाम में तीन चरणों में विकास कार्य होंगे। फिलहाल मास्टर प्लान के तहत प्रस्तावित निर्माण कार्यों के लिए प्रभावित होने वाली सरकारी एवं निजी भूमि, भवन और दूसरी संपत्तियों का आंकलन किया जा रहा है। मास्टर प्लान के तहत तीन चरण में क्या-क्या काम होंगे, ये भी बताते हैं। डीएम स्वाति एस भदौरिया के अनुसार पहले चरण में शेष नेत्र झील और बद्रीश झील का सौंदर्यीकरण किया जाएगा। यहां सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा, ताकि ज्यादा से ज्यादा श्रद्धालु यहां पहुंच सकें। बदरीनाथ धाम यात्रा उत्तराखंड में धार्मिक पर्यटन का आधार है, इसलिए यात्रा को सुविधाजनक बनाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा।

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दूसरे चरण में बदरीनाथ मुख्य मंदिर और उसके आसपास के क्षेत्र का सौंदर्यीकरण किया जाएगा। यहां आवागमन की सुविधाओं को बेहतर बनाया जाएगा। योजना के अंतिम चरण में बदरीनाथ धाम से शेष नेत्र झील को जोड़ने वाले पथ का निर्माण प्रस्तावित है। मास्टर प्लान के तहत बदरीनाथ धाम में तालाबों का सौंदर्यीकरण, रिवर फ्रंट डेवलपमेंट और पार्किंग फेसेलिटी विकसित की जाएगी। डीएम ने बताया कि मास्टर प्लान तैयार है। एसडीएम को निर्माण कार्यों के लिए प्रभावित होने वाली निजी एवं सरकारी परिसंपत्तियों का पूरा ब्यौरा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। अनुमति मिलते ही परियोजना का काम शुरू किया जाएगा।