चंबा के युवक ने स्वरोजगार की राह अपनाते हुए पहाड़ी उत्पादों की दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों में ऑनलाइन बिक्री शुरू कर दी है।
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Komal Negi
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Image: Sishupala Rawat self employment in Garhwal
टिहरी गढ़वाल: लॉकडाउन लगने के बाद से ही उत्तराखंड के कई प्रवासियों ने वापस अपने गांव की ओर रुख किया है। उनमें से कई लोग ऐसे हैं जिन्होंने स्वरोजगार को अपनाया है और अब गांव में बैठकर शानदार आमदनी कर रहे हैं। स्वरोजगार के कुछ ऐसे उदाहरण हमारे सामने आए हैं जिन्होंने स्वरोजगार के पथ पर चल कर सफलता हासिल की है और अपने साथ और भी लोगों को रोजगार दिया है। इसी कड़ी में अपना नाम जोड़ा है टिहरी के चंबा निवासी शिशुपाल रावत ने। शिशुपाल ने स्वरोजगार शुरू करते हुए पहाड़ी उत्पादों की ऑनलाइन बिक्री शुरू कर दी है। पौड़ी के कोटद्वार क्षेत्र से शुरू करके अब उनके काम को चमोली जिले में भी विस्तार दिया जा रहा है। बता दें कि शिशुपाल ने अपने साथ स्वरोजगार में 15 और युवकों को भी रोजगार दिया है। पहाड़ी उत्पादों की बिक्री से वह महीने के लाखों कमा रहे हैं। आइए जानते हैं उन्होंने अपना यह काम किस तरह शुरू किया।
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श्रीनगर गढ़वाल विश्वविद्यालय से एमबीए टूरिज्म की पढ़ाई करने वाले टिहरी के चंबा निवासी शिशुपाल रावत ने तकरीबन 10 साल तक शहरों में रहकर विभिन्न कंपनियों में काम किया। वह बीते फरवरी लॉकडाउन शुरू होने से पहले ही अपने घर आ गए और तब उनको पहाड़ी उत्पादों की बिक्री करने का आइडिया आया। बाहरी राज्यों में भी उत्तराखंड के उत्पादों की जबरदस्त मांग है। उन्होंने कोटद्वार से अपना काम करना शुरू किया। पहाड़ी उत्पादों को मुंबई और दिल्ली जैसे बड़े शहरों तक पहुंचाने के लिए उन्होंने 'पहाड़ी टेस्ट' नाम का ऑनलाइन पोर्टल बनाया है। इन उत्पादों में लोबिया, गहत, राजमा, चौसा, पहाड़ी आलू, भट्ट, मंडवा, उड़द, सोयाबीन, भंगजीरा इत्यादि शामिल हैं। बता दे कि वह पोर्टल होने के कारण भारत के हर कोने से लोग उत्तराखंड के उत्पादों को अपने घर तक मंगवा सकते हैं। शिशुपाल ने इसकी शुरुआत कोटद्वार से लगे जयहरीखाल और उसके आसपास के ब्लॉकों से की और अब चमोली जिले में भी अपने इस बिजनेस को विस्तार देने के लिए गोपेश्वर और उसके आसपास तक पहुंच बना रहे हैं। आगे पढ़िए
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बता दें कि ऋषिकेश में वे इन उत्पादों के लिए एक गोदाम भी तैयार करवा रहे हैं। इस समय उनके साथ दिल्ली, कोटद्वार और मुंबई आदि जगहों से तकरीबन 15 युवक जुड़े हुए हैं जिनके जरिए वह उत्तराखंड के अनेक गांव से उत्पाद एकत्रित करके लोगों तक पहुंचा रहे हैं। शिशुपाल रावत ने बताया कि उन्होंने तकरीबन 4 लाख के बजट से अपना यह व्यवसाय शुरू किया। इस समय उनके साथ इस काम में 15 युवक जुड़े हुए हैं। ऑनलाइन सामान बेचकर वह प्रतिमाह लगभग 2 लाख तक की आमदनी कमा रहे हैं। उन्होंने बताया कि वह हफ्ते में 200 किलो तक पहाड़ी उत्पाद बेच रहे हैं। पहाड़ी उत्पादों की बड़े शहरों में बेहद भारी डिमांड है, इसलिए उन्होंने अपना वेबपोर्टल भी शुरू किया है। शिशुपाल रावत का कहना है कि स्वरोजगार इस समय पहाड़ों की जरूरत है और कई अगर ठीक से रिसर्च कर स्वरोजगार शुरू किया जाए तो गांव में बैठे हुए शहरों से अच्छी आमदनी हो सकती है। व्यवसाय का विस्तार होने के बाद और भी लोगों को स्वरोजगार के जरिए रोजगार मिल सकता है।