उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में अलग-अलग सुर..साफ दिखने लगी रार

कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारियों की बैठक में हरदा का मौजूद नहीं रहना कांग्रेस के लिए आने वाले समय में मुसीबतें बढ़ा सकता है।
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Uttarakhand assembly elections: Uttarakhand Congress officials meeting
Image: Uttarakhand Congress officials meeting

देहरादून: उत्तराखंड में विधानसभा चुनावों को लेकर सभी पार्टियां अपने-अपने स्तर पर पूरी तैयारियां कर रही हैं। उत्तराखंड की एक मुख्य पार्टी और कई सालों तक सत्ता में रही कांग्रेस पार्टी भी चुनाव की तैयारियों में जुट गई है मगर कांग्रेस के दिग्गजों के बीच दरार साफ बढ़ रही है जो कि कांग्रेस के लिए भविष्य में चिंता का विषय बन सकता है। उत्तराखंड में कांग्रेस के नेताओं के बीच अनबन बढ़ती जा रही है। जहां एक ओर कई नेता पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के ऊपर तंज कसते नजर आ रहे हैं तो कई नेताओं के बीच में आपसी दुश्मनी भी साफ दिख रही है। कांग्रेस भले ही एकजुटता की कसरत कर रही हो मगर दिग्गजों के दिलों के बीच में एक दूसरे को लेकर दूरियां और द्वेष अभी भी बरकरार है। हाल ही में बीते शनिवार को प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव अपने देहरादून के दौरे पर आए और कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारियों की बैठक हुई थी मगर उस बैठक में हरदा शामिल नहीं रहे। देहरादून में होने के बावजूद भी हरदा का बैठक में शामिल नहीं होना कांग्रेस की एकजुटता पर कई सवाल उठाता है। बैठक के दौरान नेता प्रतिपक्ष डॉक्टर इंदिरा हृदयेश पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के ऊपर कटाक्ष करती नजर आईं। उन्होंने कहा कि प्रदेश प्रभारी के आने से कुछ व्यक्तियों को काफी अधिक तकलीफ हो सकती है। वही गौर करने वाली बात यह है कि दून में मौजूदगी के बावजूद पूर्व मुख्यमंत्री एवं पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत इस बैठक में नहीं मौजूद हुए।

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दरअसल बीते शनिवार को पार्टी के प्रदेश मुख्यालय में प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव की मौजूदगी में कांग्रेस पदाधिकारियों की बैठक हुई थी जिसमें नेता प्रतिपक्ष डॉक्टर इंदिरा हृदयेश ने इशारों-इशारों में ही हरदा के ऊपर कटाक्ष कर दिया। कांग्रेस के नेताओं एवं प्रभारियों के बीच में इस तरह द्वंद एवं द्वेष आने वाले चुनाव में कांग्रेस पार्टी के लिए बड़ी मुसीबत बन सकते हैं। बैठक में मौजूद रहे प्रदेश पदाधिकारी इस बात से नाराज नजर आए। प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव द्वारा शनिवार को आयोजित बैठक में कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत पहुंचे ही नहीं, यह बात कांग्रेस के नेताओं को काफी खटक रही है। पार्टी नेताओं के बीच हरीश रावत का ना मौजूद रहना चर्चा का विषय रहा। आने वाले दिनों में इस मुख्य बैठक में हरीश रावत की गैरमौजूदगी का मुद्दा मुसीबत बन सकता है। हालांकि जब पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र कुमार को इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि राजभवन में प्रदेश कांग्रेस के पदाधिकारियों की बैठक की और बैठक में पार्टी के नेताओं को बुलाया ही नहीं गया था।

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कांग्रेस पार्टी भले ही अपनी एकजुटता का प्रदर्शन कर रही हो मगर फिर भी बीते कुछ समय से कांग्रेस के दिग्गज नेताओं के बीच जो द्वेष और नफरत की दीवार खड़ी हो रही है यह पार्टी के लिए मुसीबत बन सकती है। वहीं बैठक में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत पर चुटकी भी ली। सबको याद होगा कि बंशीधर भगत ने हाल ही में कांग्रेस की सबसे वरिष्ठ नेता डॉक्टर इंदिरा हृदेश के ऊपर अमर्यादित टिप्पणी की थी। इसके ऊपर काफी बवाल भी हुआ था। यह टिप्पणी इस हद तक भाजपा को भारी पड़ गई थी कि स्वयं सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत को उसके लिए रात को टि्वटर पर माफी मांगने पड़ी। इसी टिप्पणी पर कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत के ऊपर तंज कसते हुए कहा कि रामलीला में दशरथ का पात्र निभाते-,निभाते वह खुद ही रावण के पात्र को आत्मसात कर चुके हैं और इसी वजह से उन्होंने नेता प्रतिपक्ष इंदिराके ऊपर अमर्यादित टिप्पणी की।