हजारों लोगों के सड़क पर इस तरह इकट्ठा होने की वजह से रोड पर जाम लग गया। भीड़ को संभालने में पुलिस के भी पसीने छूट गए। आगे पढ़िए पूरी खबर
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Komal Negi
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Secret Himalayan Treks Near Kedarnath You’ve Never Heard Of
Trails once used by sages, locals, and shepherds. Ideal for travelers seeking silence over social media fame.
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Image: 19 km long human chain in Chamoli
चमोली: विरोध-प्रदर्शनों का अपना इतिहास रहा है। मानव सभ्यता की शुरुआत के साथ ही किसी मुद्दे पर अपनी असहमति जताने के लिए इंसान विरोध-प्रदर्शनों का सहारा लेते रहे हैं। कई बार तो मामूली से लगने वाले विरोध-प्रदर्शन बाद में बड़ी क्रांति का सूत्रधार भी बने। एक ऐसे ही अनोखे विरोध-प्रदर्शन की तस्वीरें चमोली के कर्णप्रयाग ब्लॉक से आई हैं। यहां सड़क के चौड़ीकरण की मांग को लेकर ग्रामीणों ने 19 किमी लंबी मानव श्रृंखला बनाकर सरकार के सामने अपनी मांग रखी। रविवार को घाट और कर्णप्रयाग ब्लॉक के 70 ग्राम पंचायतों के 7000 से अधिक ग्रामीण एकजुट हुए और दो गज दूरी के नियम के साथ घाट बाजार से नंदप्रयाग बाजार तक मानव श्रृंखला बनाई। हजारों लोगों के सड़क पर इस तरह इकट्ठा होने की वजह से रोड पर जाम लग गया। भीड़ को संभालने में पुलिस के भी पसीने छूट गए। चलिए अब ग्रामीणों की मांग के बारे में जानते हैं। गोपेश्वर में नंदप्रयाग से घाट तक 19 किमी लंबी सड़क है। ग्रामीण इसी सड़क के डेढ़ लेन चौड़ीकरण की मांग कर रहे हैं। अपनी मांग को लेकर ग्रामीण पिछले एक महीने से धरने पर बैठे हैं, लेकिन सरकार सुन नहीं रही। आगे पढ़िए
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गोपेश्वर-नंदप्रयाग-घाट मार्ग का निर्माण वर्ष 1962 में हुआ था। यह सड़क घाट ब्लॉक के 55 और कर्णप्रयाग के 15 ग्राम पंचायतों को आपस में जोड़ती है। इस मार्ग को ही ग्रामीण डेढ़ लेन तक चौड़ा करने की मांग कर रहे हैं। रविवार को क्षेत्र के घाट, कमेड़ा, कांडई पुल, जाखणी, सेतोली, मंगरौली, घिंघराण और नंदप्रयाग समेत क्षेत्र के 70 गांवों के ग्रामीण अपने-अपने क्षेत्र से वाहनों से घाट और नंदप्रयाग में इकट्ठा हुए, और दोनों जगहों से दो गज की दूरी बनाकर मानव श्रृंखला बनाई गई। ग्रामीणों ने कहा कि दो वर्ष पहले मुख्यमंत्री ने सड़क को डेढ़ लेन चौड़ीकरण में तब्दील करने की घोषणा की थी, लेकिन इस दिशा में अब तक काम नहीं हुआ। सरकार की वादाखिलाफी से ग्रामीणों में नाराजगी है। उन्होंने कहा कि सरकार ने जल्द मांग न मानी तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। सरकार की ओर से सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन मिलने के बाद ही आंदोलन स्थगित किया जाएगा।