जगदीश कुनियाल ने 18 साल की उम्र में अपने गांव की बंजर जमीन पर पौधरोपण का कार्य शुरू किया था। वो पिछले 40 साल से पर्यावरण और जल संरक्षण के लिए काम कर रहे हैं।
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Komal Negi
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Image: Story of uttarakhand jagdish kuniyal
देहरादून: हम हर दिन सैकड़ों लीटर पानी इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इसका संरक्षण कितना जरूरी है, ये पहाड़ में रहने वाले लोगों से पूछिए। हम इस बात पर कभी विचार नहीं करते कि जिस दिन पीने लायक पानी पूरी तरह खत्म हो गया, उस दिन मानव जाति का क्या होगा। हम पानी का महत्व तब तक नहीं समझ सकते, जब तक हम अपनी जरूरत का पानी नदी से खुद न लाने लगें। बागेश्वर के रहने वाले जगदीश कुनियाल इस बात को जानते थे। यही वजह है कि उन्होंने सबसे पहले गांवों के पेयजल संकट को दूर करने की ठानी। अपने भगीरथ प्रयासों से वो गांव में हरियाली लाने के साथ ही स्थानीय गदेरों को दोबारा रिचार्ज करने में सफल रहे। इस तरह उनकी मेहनत की बदौलत गांव में पेयजल के साथ ही सिंचाई की समस्या भी दूर हो गई।
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जल और पर्यावरण संरक्षण के लिए जगदीश कुनियाल ने जो शानदार काम किए, उसकी तारीफ पीएम नरेंद्र मोदी भी कर चुके हैं। रविवार को ‘मन की बात’ कार्यक्रम में पीएम नरेंद्र मोदी ने जगदीश कुनियाल द्वारा किए जा रहे कामों की तारीफ की। पीएम मोदी ने कुनियाल को बधाई देते हुए कहा कि उनके प्रयासों से विभिन्न गांवों में पानी की समस्या दूर हो गई है। उनके प्रयासों से अन्य क्षेत्र के ग्रामीणों को भी प्रेरणा मिलेगी। चलिए अब आपको जगदीश कुनियाल और उनके मिशन के बारे में और जानकारी देते हैं। 57 साल के जगदीश कुनियाल सिरकोट गांव के रहने वाले हैं। वो पिछले 40 साल से पौधरोपण कर पर्यावरण और जल संरक्षण के लिए काम कर रहे हैं। जगदीश कुनियाल ने 18 साल की उम्र में अपने गांव की बंजर जमीन पर पौधरोपण का कार्य शुरू किया था।
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पिछले 40 सालों से वह विभिन्न प्रजातियों के 25 हजार से अधिक पौधे रोपकर उनका संरक्षण कर रहे हैं। प्रकृति से प्यार करने वाले जगदीश कुनियाल ने अपनी 800 नाली जमीन पर चाय का बागान तैयार किया है। जिसके जरिए उनकी आजीविका चलती है। जगदीश के बसाये जंगल से क्षेत्र में सूख रहे प्राकृतिक जल स्रोतों को नया जीवन मिल रहा है। एक वक्त था जब गांव में जंगल घटने के साथ ही गदेरे भी सूखने लगे थे, लेकिन वर्तमान में गांव के सभी जल स्रोतों में भरपूर पानी है। जिसका उपयोग लोग पीने के अलावा खेती के काम में भी कर रहे हैं। पर्यावरण संरक्षण की मिसाल बन चुके जगदीश गांव के दूसरे लोगों को भी हरियाली और जल स्त्रोत बचाने का संदेश दे रहे हैं।