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हजारों वर्षों से जलती अखंड ज्योति के सामने सात फेरे - आस्था, परंपरा और प्रकृति का अनोखा संगम
पहाड़, मंत्र और देवभूमि का आशीर्वाद.. त्रियुगीनारायण में शादी सिर्फ एक समारोह नहीं, आध्यात्मिक अनुभव है।
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हरिद्वार: हरिद्वार महाकुंभ। दुनिया का सबसे बड़ा आध्यात्मिक मेला। गुरुवार को यहां 200 महिला नागा संन्यासियों को दीक्षा दी गई। श्रीपंच दशनाम जूना अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि से मिले प्रेयस मंत्र और गेरुआ वस्त्र को धारण करने के साथ ही सैकड़ों महिला नागा संन्यासी मोह-माया के बंधन तोड़ अवधूतानी के रूप में दीक्षित हो गईं। अब सभी अवधूतानी 12 अप्रैल और उसके बाद होने वाले शाही स्नान में वरिष्ठ संतों संग हिस्सा ले सकेंगी। नागा साधुओं के अखाड़ों में महिला संन्यासियों की एक खास पहचान होती है। महिला साधु पुरुष नागाओं की तरह नग्न रहने के बजाए एक गेरूआ वस्त्र लपेटकर जीवन यापन करती हैं। हरिद्वार में दो दिवसीय दीक्षा कार्यक्रम के आखिरी दिन गुरुवार को सभी संन्यासिनों को ब्रह्ममुहूर्त में प्रेयस मंत्र प्रदान किया गया। इससे पहले बुधवार को गंगा घाट पर शिखा सूत्र त्याग करने के साथ ही मुंडन संस्कार समेत अन्य संस्कार पूरे किए गए थे। नागा संन्यासी के तौर पर दीक्षित होने वाली अवधूतानी को अपना पुराना नाम, स्थान और परिचय का त्याग करना पड़ता है। दीक्षा के बाद उन्हें नया नाम दिया जाता है, साथ ही माई या माता कहकर संबोधित किया जाता है। आगे पढ़िए