उत्तराखंड: कुंभ के दौरान कोरोना जांच में फर्जीवाड़ा, 1 लाख टेस्ट संदेह के घेरे में..जानिए मामला

आरोप है कि फर्म ने कई जांचों के दौरान एक ही मोबाइल नंबर का इस्तेमाल किया। जबकि एक ही पते पर 500 जांचें कराई गईं। यही नहीं जो लोग कुंभ में आए ही नहीं थे
Advertisement Cheapest Chardham Yatra 2026 Package? The Price Will Shock You!

Planning Chardham in 2026? These 5 Packages Are Getting Booked Fast

Example Ads Media
Haridwar Kumbh: Fraud in coronavirus test during Haridwar Kumbh
Image: Fraud in coronavirus test during Haridwar Kumbh

हरिद्वार: हरिद्वार महाकुंभ। दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक। अप्रैल में उत्तराखंड के हरिद्वार में महाकुंभ का आयोजन किया गया। मेले को सुरक्षित बनाने के लिए राज्य सरकार ने यहां बड़े पैमाने पर कोरोना जांचें कराईं, लेकिन कुछ सयाने लोगों ने इसमें भी खेल कर दिया। मेले के दौरान कोरोना जांच में घोटाले का मामला सामने आया है। जांच के दौरान एक फर्म की करीब एक लाख जांचें संदेह के घेरे में हैं। आरोप है कि फर्म ने पैसा बनाने के लिए कई फर्जी जांचें कीं। कई जांच के दौरान एक ही मोबाइल नंबर का इस्तेमाल किया गया। जबकि एक ही पते पर 500 जांचें कराई गई। यही नहीं कई मामलों में जो लोग कुंभ में आए ही नहीं थे, उनके फोन पर भी कोविड टेस्ट रिपोर्ट भेज दी गई। मामला कैसे सामने आया ये भी बताते हैं। इस मामले में पंजाब निवासी एक व्यक्ति ने स्वास्थ्य विभाग से शिकायत की थी। शिकायत के बाद जब कोविड कंट्रोल रूम की टीम ने प्रारंभिक जांच की तो एक फर्म की करीब एक लाख जांचें संदेह के घेरे में आ गईं। सचिव स्वास्थ्य अमित नेगी के निर्देशों के बाद हरिद्वार के जिलाधिकारी ने जांच शुरू कर दी है। आगे पढ़िए

यह भी पढ़ें - उत्तराखंड: नेवले से डरकर बिजली के तारों पर चढ़ा सांप, वन विभाग ने बचाई जान..देखिए वीडियो
आपको बता दें कि हाईकोर्ट ने कुंभ में रोजाना 50 हजार जांचें करने का आदेश दिया था, जिस पर सरकार ने नौ फर्मों को जांच की जिम्मेदारी सौंपी थी। इन नौ फर्मों में से कई फर्मों ने आरटीपीसीआर जांच की तो कई ने एंटीजन जांच की। पिछले दिनों पंजाब के एक शख्स ने कोरोना जांच में धांधली को लेकर शिकायत की थी। जांच हुई तो एक फर्म द्वारा की गई एक लाख कोरोना जांच में गड़बड़ी पाई गई। फर्म ने एक ही पते पर 500 जांचें कराई। इनमें तमाम जांचें तो ऐसी थी, जिनमें एक ही मोबाइल नंबर का इस्तेमाल किया गया था। सैंपलों में पॉजिटिव दर कम और निगेटिव दर भी ज्यादा पाई गई। एक ही सैंपल आईडी और मोबाइल नंबर से कई लोगों को जांच रिपोर्ट जारी की गई। हर व्यक्ति के सैंपल की आईडी अलग होती है, लेकिन फर्म की 90 प्रतिशत सैंपल कलेक्शन की एंट्री राजस्थान की है, इसलिए पतों को लेकर भी संदेह बना हुआ है। यह गड़बड़ी रैपिड एंटीजन टेस्टिंग में सामने आई है। अब सचिव स्वास्थ्य अमित नेगी ने इसकी जांच हरिद्वार जिलाधिकारी को सौंपते हुए 15 दिन में रिपोर्ट मांगी है। डीएम इस मामले की जांच कर रहे हैं।