इस बार उत्तराखंड में कांवड़ियों की एंट्री बैन, जबरदस्ती घुसे तो दर्ज होगा मुकदमा

राज्य की सीमाओं को कांवड़ियों के लिए 24 जुलाई से सील कर दिया जाएगा। रोक के बावजूद अगर कोई कांवड़िया गंगाजल लेने उत्तराखंड आया तो उसके खिलाफ केस दर्ज होगा।
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Kanwar Yatra Uttarakhand: There will be no Kanwar Yatra in Uttarakhand
Image: There will be no Kanwar Yatra in Uttarakhand

हरिद्वार: कोरोना की दूसरी लहर ने उत्तराखंड में जमकर कहर बरपाया। हजारों लोगों की जान चली गई। कोरोना की दूसरी लहर के लिए महाकुंभ में उमड़ी भीड़ को जिम्मेदार बताया गया। ऐसी स्थिति दोबारा न आए, इसके लिए राज्य सरकार ने प्रदेश में कांवड़ यात्रा पर रोक लगा दी है। कांवड़ियों की प्रदेश में एंट्री रोकने के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। सीमाओं को कांवड़ियों के लिए 24 जुलाई से ही सील कर दिया जाएगा। अगर कोई गंगाजल लेने उत्तराखंड आया तो उसके खिलाफ केस दर्ज होगा। उत्तराखंड में कांवड़ियों को एंट्री नहीं मिलेगी, अलबत्ता अगर दूसरे राज्यों की सरकारें या कांवड़ संघ टैंकर से गंगाजल लेने की अनुमति मांगते हैं, तो पुलिस इसमें उनकी मदद जरूर कर सकती है। बता दें कि उत्तराखंड ने भले ही कांवड़ यात्रा पर रोक लगाई हुई है, लेकिन यूपी में कांवड़ यात्रा की अनुमति होने के चलते कांवड़ियों के उत्तराखंड पहुंचने की आशंका है। कांवड़ियों की भीड़ को बॉर्डर पर रोकने के लिए पुलिस ने विशेष इंतजाम किए हैं।यह भी पढ़ें - उत्तराखंड भू-कानून: सोशल मीडिया पर छा गई पहाड़ की ‘लाटी’, मिला जबरदस्त समर्थन
प्रदेश की सीमाएं 24 जुलाई से पूरी तरह सील कर दी जाएंगी। अगले सप्ताह तक सभी अंतरराज्यीय चेकपोस्ट पर अतिरिक्त फोर्स तैनात कर दी जाएगी। डीजीपी अशोक कुमार ने कहा कि बॉर्डर पर आने वाले कांवड़ियों को पहले समझा कर वापस भेजा जाएगा, फिर भी किसी ने जबरदस्ती की तो पुलिस सख्ती से काम लेगी। डीजीपी अशोक कुमार ने बताया कि पुलिस अन्य राज्यों के अधिकारियों के साथ सम्पर्क में है, ताकि किसी तरह कांवड़ियों को उत्तराखंड आने से रोका जा सके। प्रदेश में कांवड़ियों को दाखिल होने की अनुमति नहीं दी जाएगी, हालांकि राज्य सरकारें, प्रशासन या कांवड़ समितियां टैंकर से गंगाजल ले जाना चाहें तो इस के लिए अधिकतम दो लोगों को राज्य में प्रवेश की अनुमति प्रदान की जा सकती है। लोगों की सुरक्षा हमारे लिए सर्वोपरि है। राज्य में कांवड़ यात्रा पर रोक का सख्ती से पालन किया जाएगा। पड़ोसी राज्यों से भी लगातार बातचीत की जा रही है, ताकि नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा सके।