जब केदारनाथ धाम के कपाट बंद होते हैं और केदारनाथ में कोई नहीं रहता है तो भैरवनाथ ही संपूर्ण केदारनगरी की रक्षा करते हैं।
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Komal Negi
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Image: Story behind bhairav Nath Kedarnath
रुद्रप्रयाग: केदारनाथ। भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से प्रमुख ज्योतिर्लिंग। उत्तराखंड में मौजूद इस मंदिर में हर साल हजारों-लाखों भक्त दर्शन करने के लिए आते हैं। आमतौर पर भक्त बाबा केदार की ही पूजा-अर्चना करते हैं, लेकिन बाबा केदार के अलावा कोई और भी है, जिनकी पूजा के बिना बाबा केदार की पूजा फल नहीं देती। ये हैं क्षेत्र रक्षक बाबा भैरवनाथ। जब केदारनाथ धाम के कपाट बंद होते हैं और केदारनाथ में कोई नहीं रहता है तो भैरवनाथ ही सम्पूर्ण केदारनगरी की रक्षा करते हैं। बाबा भैरवनाथ का मंदिर केदारनाथ धाम से आधा किमी दूर स्थित है। जो भक्त बाबा केदार के दर्शनों को आते हैं, वो भैरवनाथ के दर्शन भी जरूर करते हैं। जब बाबा केदार की पंचमुखी चल विग्रह उत्सह डोली ऊखीमठ से केदारनाथ धाम के लिए रवाना होती है तो उससे एक दिन पूर्व भगवान भैरवनाथ की पूजा-अर्चना की जाती है। डोली के केदारनाथ धाम पहुंचने पर मंदिर के कपाट तो खोले जाते हैं, लेकिन बाबा केदार की आरती और भोग तब तक नहीं लगता है जब तक बाबा भैरवनाथ के कपाट न खोले जाएं।
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बाबा भैरवनाथ को केदारघाटी का रक्षक माना जाता है, जो हर बुराई को केदारनगरी से दूर रखते हैं। केदारनाथ में क्षेत्ररक्षक भैरवनाथ का कोई मंदिर नहीं है। यहां पर खुले आसमान में भगवान की मूर्तियां और शिला स्थापित हैं। भैरवनाथ ऊंचाई वाले स्थान पर बसे हुए हैं। भैरवनाथ मंदिर से हिमालय के साथ ही सम्पूर्ण केदारनगरी का मनमोहक दृश्य देखा जा सकता है। केदारनाथ के मुख्य पुजारी बांगेश लिंग बाबा कहते हैं कि भैरवनाथ का मंदिर एक सिद्ध स्थल है। केदारनाथ धाम में इतनी बड़ी आपदा आई थी, लेकिन भैरवनाथ को कहीं भी कोई नुकसान नहीं पहुंचा। बाबा भैरव ने आपदा आने का संकेत पहले से दे दिया था। अष्ट भैरव के रूप में भैरवनाथ की पूजा-अर्चना की जाती है। इस स्थान पर योग-ध्यान करने से सिद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है। जिस तरह केदारनाथ भगवान के दर्शन का अपना अलग महत्व है, ठीक उसी तरह भैरवनाथ के दर्शनों का भी है।