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हजारों वर्षों से जलती अखंड ज्योति के सामने सात फेरे - आस्था, परंपरा और प्रकृति का अनोखा संगम
पहाड़, मंत्र और देवभूमि का आशीर्वाद.. त्रियुगीनारायण में शादी सिर्फ एक समारोह नहीं, आध्यात्मिक अनुभव है।
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टिहरी गढ़वाल: सीमा पर देश की सेवा करने वाले जवानों की वजह से ही आज आप और हम सुरक्षित हैं, अपने-अपने घरों में हम परिवार के साथ समय व्यक्त कर पा रहे हैं। उत्तराखंड के कितने ही वीर सपूत सीमा पर देश के लिए शहादत दे चुके हैं। कुछ जवान ऐसे भी थे जो आज हमारे बीच होते तो दिवाली का पावन पर्व मना रहे होते। इन्हीं में एक जवान थे शहीद विक्रम सिंह (Shaheed vikram singh negi)..टिहरी गढ़वाल के विमाण गांव का बेटा विक्रम। 14 अक्तूबर की रात जम्मू-कश्मीर के पुंछ में आतंकियों से मुठभेड़ में विक्रम सिंह शहीद हो गए थे। वर्तमान में वे सेना की 48 आरआर (राष्ट्रीय रायफल) रेजीमेंट में जम्मू-कश्मीर में ड्यूटी पर थे। राइफलमैन विक्रम सिंह नेगी पुत्र साब सिंह नेगी अभी डेढ़ माह पहले ही ड्यूटी पर गए थे। 3 साल पहले उनकी शादी हुई थी। उन्होंने अपनी पत्नी और मां से बातचीत भी की थी और 22 अक्टूबर को गांव में आयोजित होने वाली पूजा में आने का वादा भी किया था। आगे पढ़िए
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