केदारनाथ के पहले रावल हैं भुकुंट भैरव, आज भी करते हैं केदारपुरी की रक्षा

केदारनाथ के पहले रावल भुकुंट भैरव(bhukunt bhairav kedarnath) करते हैं केदारनाथ मंदिर की रखवाली, इनके दर्शन किए बगैर अधूरी है केदारनाथ यात्रा
Advertisement 90% ट्रेकर्स नहीं जानते केदार हिमालय के ये सीक्रेट रूट्स

प्रकृति से जुड़ने और आत्मिक शांति पाने का अवसर। केदार हिमालय की वो यात्राएं जो ज़िंदगी भर याद रहती हैं।

Example Ads Media
Kedarnath bhukunt bhairav: Story of bhukunt bhairav kedarnath
Image: Story of bhukunt bhairav kedarnath

रुद्रप्रयाग: देवों की भूमि कहलाए जाने वाले उत्तराखंड में हर वर्ष सैकड़ों लोग बाबा केदारनाथ की यात्रा के लिए आते हैं। मगर क्या आप जानते हैं कि केदारनाथ यात्रा काल भैरव जी (bhukunt bhairav kedarnath) के दर्शन किए बगैर अधूरी मानी जाती है। जी हां, हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार देश में जहां-जहां पर भी भगवान शिव का सिद्ध मंदिर है वहां-वहां पर काल भैरव जी के मंदिर की है और इन मंदिरों के दर्शन किए बगैर भगवान शिव के दर्शन करना अधूरा माना जाता है। काशी के बाबा विश्वनाथ हों या उज्जैन के बाबा महाकाल, केदारनाथ से लेकर अमरनाथ तक.. हर जगह सभी श्रद्धालु महादेव के साथ ही काल भैरव जी के दर्शन भी करते हैं। भगवान शिव के दर्शन के बाद भुकुंट भैरव के दर्शन करने के बाद ही तीर्थ यात्रा पूर्ण मानी जाती है।
यह भी पढ़ें - जय बदरी विशाल: दीपोत्सव के लिए सज गया देवभूमि का भू-बैकुण्ठ, देखिए खूबसूरत तस्वीरें

  • महाभैरव की महागाथा

    Story of bhukunt bhairav kedarnath
    Pic: 1/ 4
    Image: Story of bhukunt bhairav kedarnath

    केदारनाथ धाम की बात करें तो केदारनाथ में भी भुकुंट भैरव नाथ का मंदिर मौजूद है और हर साल केदारनाथ के कपाट खुलने से पहले भैरव मंदिर में पूजा पाठ की जाती है। भीषण भैरव, संहार भैरव, बटुक भैरव आदि अनेक नामों के साथ वे महादेव के साथ वास करते हैं और केदारनाथ में बिना भुकुंट भैरव के दर्शन के यात्रा पूर्ण नहीं होती है। बता दें कि बाबा भैरव केदारनाथ क्षेत्र के क्षेत्र पाल देवता हैं और बाबा केदार के पहले रावल हैं।

  • शीतकाल में रक्षा करते हैं भैरव

    Story of bhukunt bhairav kedarnath
    Pic: 2/ 4
    Image: Story of bhukunt bhairav kedarnath

    शीतकाल प्रवास में क्षेत्र की रक्षा का जिम्मा भुकुंट भैरव के हिस्से आता है और बाबा केदारनाथ के कपाट खोलने से पहले हमेशा भुकुंट भैरव की पूजा की जाती है। ऐसी मान्यता है कि भुकुंट बाबा केदारनाथ के पहले रावल थे और उनका मंदिर केदारनाथ मंदिर के दक्षिण में स्थित है। मुख्य केदारनाथ मंदिर से इसकी दूरी लगभग आधा किलोमीटर दूर है। बाबा केदारनाथ की पूजा से पहले भुकुंट बाबा की पूरे विधि विधान से पूजा की जाती है और उसके बाद ही परंपरागत तरीकों से बाबा केदारनाथ के कपाट खोले जाते हैं।

  • केदारनाथ के पहले रावल

    Story of bhukunt bhairav kedarnath
    Pic: 3/ 4
    Image: Story of bhukunt bhairav kedarnath

    कहा तो यह भी जाता है कि कुछ साल पहले हुए पुरोहितों से पूजा पाठ में कुछ कमी रह गई थी जिस कारण केदारनाथ मैं भीषण आपदा आई थी। स्थानीय लोग यही बताते हैं कि 2017 में मंदिर समिति और प्रशासन के कुछ लोगों को कपाट बंद करने में काफी परेशानी हुई थी।

  • माने जाते हैं जागृत देवता

    Story of bhukunt bhairav kedarnath
    Pic: 4/ 4
    Image: Story of bhukunt bhairav kedarnath

    कपाट के कुंडे लगाने में दिक्कत हो रही थी जिसके बाद पुरोहितों ने भगवान केदार के क्षेत्रपाल भुकुंट भैरव की पूजा की और कुछ समय के बाद कपाट बिना दिक्कत के बंद हो गया। मान्यता है कि शीतकाल में केदारनाथ मंदिर की रखवाली बटुक भैरव करते हैं।