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जहां आज भी सिर्फ चरवाहे जाते हैं – केदार हिमालय के अनदेखे ट्रेक्स
प्रकृति, शांति और हिमालय – केदार के गुप्त ट्रेक्स.. यहां कदम रखते ही बदल जाती है सांस और सोच – Hidden Kedar Trails
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चमोली: देवभूमि उत्तराखंड की कुछ बातें वास्तव में बेमिसाल हैं। कुछ कहानियां ऐसी हैं, जो वास्तव में सोचने पर मजबूर कर देती हैं कि हमारे पूर्वजों के वक्त कैसी परंपराएं निभाई जाती थीं। इन्हीं पौराणिक परंपराओं मे एक कहानी या यूं कहें कि एक जनश्रुति ऐसी भी जिसके बारे में जानकर आश्चर्य होता है। पहाड़ में पौराणिक मान्यताएं है कि कभी केदारनाथ व बदरीनाथ की (Pujari track of Kedarnath Badrinath) पूजा-अर्चना के लिए पहले एक ही पुजारी थे। जी हां..अक्सर आपने केदारघाटी और बद्रिकाश्रम में इन बातों को सुना होगा। कहा जाता है कि एक ही पुजारी शाम को बदरीनाथ व सुबह केदारनाथ पूजा के लिए हिमालय की पगडंडियों से होकर पहुंचते थे। दोनों धामों के कपाट खोलने के लिए भी पुजारी व अन्य लोग इसी रास्ते से आवाजाही करते थे। अब उस ट्रैक की खोज हो रही है लेकिन सरकार की कोशिश परवान नहीं चढ़ पा रही है। आगे पढ़िए