सुरक्षित नहीं बेटी: उत्तराखंड में चरम पर मानव तस्करी, हिमालयी राज्यों में टॉप पर अपना राज्य

Uttarakhand में human trafficking के बढ़ते मामलों ने एक शर्मनाक रिकॉर्ड बनाया है। दुर्भाग्य से मानव तस्करी के मामलों में अपना उत्तराखंड राज्य टॉप पर है।
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Human Trafficking in Uttarakhand: Uttarakhand Tops in Human Trafficking Among Himalayan States
Image: Uttarakhand Tops in Human Trafficking Among Himalayan States

उधमसिंह नगर: पहाड़ की गरीब-लाचार बेटियां मानव तस्करों के निशाने पर हैं। कभी शादी तो कभी नौकरी के बहाने पहाड़ की बेटियों को दूसरे राज्यों में बेच दिया जाता है। प्रदेश में मानव तस्करी के लगातार बढ़ते मामलों के बीच उत्तराखंड ने एक शर्मनाक रिकॉर्ड बनाया है।

Human Trafficking में हिमालयी राज्यों में टॉप पर Uttarakhand:

दुर्भाग्य से मानव तस्करी के मामलों में अपना उत्तराखंड राज्य टॉप पर है। उत्तराखंड पुलिस की तमाम कोशिशों के बावजूद मानव तस्करी रुक नहीं रही। जिस एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग सेल पर मानव तस्करी रोकने की जिम्मेदारी है, वो भी आशाजनक परिणाम नहीं दे पाई। यही वजह है कि अब डीजीपी अशोक कुमार ने सेल का पुनर्गठन कर उसके काम का मूल्यांकन करने के संकेत दिए हैं। आगे पढ़िए...

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार मानव तस्करी के मामलों में उत्तराखंड सभी हिमालयी राज्यों में टॉप पर है। साल 2017 में यहां ह्यूमन ट्रैफिकिंग के 20 मुकदमे दर्ज हुए, जबकि 34 पीड़ितों को तस्करों के चंगुल से आजाद कराया गया। इसी तरह 2018 में 29 मुकदमे और 28 पीड़ित, साल 2019 में 19 मामले और 44 पीड़ित महिलाओं को छुड़ाया गया। साल 2020 में 24 केस रिकॉर्ड हुए, जिनमें 52 महिलाएं पीड़ित पाई गईं।

कुमायूं में बहुत बुरे हालात

उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों खासकर कुमाऊं में मानव तस्करी के मामले हर साल बढ़ रहे हैं। तस्कर गरीब परिवारों की बेटियों को विवाह और अच्छी कंपनियों में जॉब के नाम पर ले जाते हैं। इन्हें पंजाब, बिहार या पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में ले जाकर कई गलत कामों में धकेल दिया जाता है। मानव तस्करों के खिलाफ कुछ महीने पहले हल्द्वानी की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग सेल ने बड़ी कार्रवाई की थी। आगे पढ़िए...

उत्तराखंड के उधमसिंह नगर जिले के खटीमा में भी नेपाल से लाई जाने वाली कई महिलाओं को पुलिस व सुरक्षा एजेंसियों ने तस्करों के चंगुल से छुड़ाया था।

सोशल मीडिया के जरिए फंसायी जा रहीं युवतियां

अब सोशल मीडिया के जरिए युवतियों को प्रेमजाल में फंसाकर मानव तस्करी का शिकार बनाया जा रहा है। इस तरह के मामलों को रोकने के लिए एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग सेल बनाई गई है, लेकिन कई जिलों में टीम का काम बेहद निराशाजनक पाया गया। अब अगले महीने से पुलिस अधिकारियों को सेल के काम का मूल्यांकन करने के निर्देश दिए गए हैं। जिसके बाद सेल का पुनर्गठन किया जा सकता है। डीजीपी अशोक कुमार ने बताया कि कुछ टीमों का काम संतोषजनक नहीं रहा है। अगले महीने मूल्यांकन के बाद एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग सेल का पुनर्गठन करने पर विचार होगा।