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Hidden Gem Treks of Kedar Himalaya You Must Explore Once in Life
Peaceful and untouched trekking routes away from the crowds. Hidden trails where nature still remains raw and pure.
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टिहरी गढ़वाल: उत्तराखंड की नई टिहरी में चंबा मसूरी सड़क मार्ग पर कद्दूखाल कस्बे के ठीक ऊपर पहाड़ की चोटी पर स्थित सिद्ध पीठ सुरकंडा मंदिर में अब दर्शन करने के लिए चढ़ाई करने की जरूरत नहीं है क्योंकि सुरकंडा मंदिर में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जल्द ही ट्रॉली संचालन शुरू होने वाला है। जी हां, जल्द ही श्रद्धालु मंदिर ट्रॉली के जरिए पहुंच सकेंगे। यहां फरवरी के अंत तक ट्रॉली संचालन शुरू होने की उम्मीद है। इससे दिव्यांग और वृद्धों के साथ ही बच्चे भी बेहद आसानी से मां सुरकंडा के दर्शन कर पाएंगे।
अबतक मंदिर में पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को कद्दूखाल कस्बे से तकरीबन डेढ़ किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई करनी पड़ती है। ऐसे में बुजुर्ग और दिव्यांग लोगों के लिए सुरकंडा मंदिर के दर्शन करना बेहद कठिन हो जाता है और उनको काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में लोगों की सुविधा के लिए ट्रॉली संचालन शुरू किया जा रहा है। दरअसल सिद्ध पीठ सुरकंडा माता मंदिर समुद्र तल से तकरीबन 2750 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। मंदिर में पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को कद्दूखाल से खड़ी चढ़ाई करनी पड़ती है। ट्रॉली के संचालन के बाद वृद्ध और दिव्यांग लोग बिना किसी कठिनाई के मंदिर में दर्शन कर सकते हैं।
32 करोड़ की लागत से रोपवे का कार्य 4 साल में पूरा होना था मगर बजट के चलते काम समय से पूरा नहीं हो सका। बता दें कि रोप वे के संचालन के लिए कुल चार टावर बनाए गए हैं। फरवरी के अंत में ट्रॉली संचालन शुरू होने की उम्मीद है और इससे श्रद्धालुओं की संख्या भी बढ़ेगी। कद्दूखाल से सुरकंडा मंदिर तक पैदल पहुंचने में अभी तक लगभग एक घंटे का समय लग जाता है। सुरकंडा रोपवे सेवा शुरू होने पर अब कद्दूखाल से सुरकंडा मंदिर तक श्रद्धालु महज तीन मिनट में पहुंच सकेंगे। रोपवे का संचालन शुरू होने से सुरकंडा मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में बढ़ोतरी होगी। अभी तक खड़ी चढ़ाई की वजह से कई श्रद्धालु मंदिर में दर्शन करने नहीं आ पाते थे। इससे ना केवल श्रद्धालुओं की संख्या में बढ़ोतरी होगी बल्कि क्षेत्र में पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। टिहरी जिले के पर्यटन अधिकारी अतुल भंडारी का कहना है कि सुरकंडा रोपवे बनकर तैयार हो गया है और उसका ट्रायल भी पूरा हो चुका है। जल्द ही ट्रॉली संचालन की अनुमति मिलने की उम्मीद है और उम्मीद जताई जा रही है कि फरवरी के अंत तक श्रद्धालुओं के लिए शुरू कर दिया जाएगा। एक समय में तीन-तीन ट्रॉलियों का संचालन किया जाएगा।